आगा रुहुल्लाह ने छोड़ी नेशनल कॉन्फ्रेंस, दिया इस्तीफा

श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और लोकसभा की सदस्यता से दिया इस्तीफा, अनुच्छेद 370 और वादों से पीछे हटने का लगाया आरोप।

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  • श्रीनगर सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी और संसद छोड़ी.
  • चुनाव वादों से मुकरने और अनुच्छेद 370 पर जताई गहरी नाराजगी.
  • जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नए सियासी समीकरण बनने के आसार.

समग्र समाचार सेवा
श्रीनगर (जम्मू-कश्मीर), 03 नवंबर: जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक बहुत बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिससे सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सरकार के खेमे में भारी हड़कंप मच गया है। श्रीनगर से लोकसभा सांसद और पार्टी के कद्दावर नेता आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी (Aga Syed Ruhullah Mehdi) ने नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्राथमिक सदस्यता और लोकसभा सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया है।

अपने पिता और दिवंगत नेता आगा सैयद मेहदी की पुण्यतिथि के अवसर पर बडगाम (Budgam) में आयोजित एक विशाल जनसभा के दौरान उन्होंने अपने इस फैसले का सार्वजनिक ऐलान किया। उन्होंने अपना दो पन्नों का औपचारिक इस्तीफा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भी भेज दिया है, जिसमें उन्होंने तुरंत प्रभाव से सांसद पद छोड़ने की बात कही है।

चुनावी वादों से भटकने और वैचारिक असहमति का आरोप

आगा रुहुल्लाह मेहदी पिछले कुछ समय से पार्टी नेतृत्व और सरकार की कार्यप्रणाली से लगातार असंतुष्ट चल रहे थे। लोकसभा और विधानसभा चुनावों के दौरान उन्होंने घाटी में पार्टी के लिए आक्रामक प्रचार किया था और वे जनता के बीच एक लोकप्रिय युवा चेहरे के रूप में उभरे थे। हालांकि, सरकार गठन के बाद से ही उन्होंने खुलकर उन मुद्दों पर आवाज उठानी शुरू कर दी थी जिन्हें लेकर पार्टी ने जनता से वादे किए थे।

रुहुल्लाह ने अपने इस्तीफे के पीछे मुख्य वजह बताते हुए कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व ने चुनाव के दौरान जनता से जो वादे किए थे, वे सत्ता में आने के बाद उन पर पूरी तरह खरे नहीं उतर रहे हैं। उनके प्रमुख मुद्दों में निम्नलिखित बातें शामिल थीं:

अनुच्छेद 370 की बहाली: केंद्र सरकार द्वारा पूर्ववर्ती राज्य के विशेष दर्जे को समाप्त किए जाने के खिलाफ मुखर रहकर संघर्ष जारी रखना।

राजनीतिक बंदी: जेलों में बंद राजनीतिक कैदियों की रिहाई और मानवाधिकारों की रक्षा के मुद्दों पर प्रशासनिक सुस्ती।

संवैधानिक अधिकार और आरक्षण: जम्मू-कश्मीर के विशेष संवैधानिक अधिकारों और स्थानीय युवाओं के हितों की अनदेखी किए जाने का आरोप।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी समझौते की राजनीति के पक्षधर नहीं हैं और अपने उसूलों के साथ खड़े रहने के लिए उन्होंने यह बड़ा त्याग किया है।

उमर अब्दुल्ला सरकार के लिए बढ़ती मुश्किलें

आगा रुहुल्लाह मेहदी का यह इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब पहले से ही जम्मू-कश्मीर की गठबंधन सरकार के भीतर आंतरिक असंतोष और विधायकों की नाराजगी की खबरें सामने आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी के भीतर एक बड़ा धड़ा मंत्रिमंडल के कामकाज और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को लेकर असहज महसूस कर रहा है।

एक लोकप्रिय और प्रभावशाली नेता के इस तरह पार्टी छोड़कर बाहर आने से नेशनल कॉन्फ्रेंस के जमीनी काडर को बड़ा झटका लगा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रुहुल्लाह का यह कदम घाटी में भविष्य के नए राजनीतिक समीकरणों और एक नए सियासी मोर्चे के गठन का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।

निष्कर्ष

आगा रुहुल्लाह मेहदी द्वारा नेशनल कॉन्फ्रेंस और संसद की सदस्यता से इस्तीफा देना कश्मीरी राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत का संकेत देता है। वैचारिक प्रतिबद्धता और जनहित के मुद्दों पर उठाया गया यह कदम आने वाले दिनों में राज्य की सियासत और विपक्षी दलों की रणनीतियों पर गहरा प्रभाव डालेगा।

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