जेल में ही मर जाऊंगा: आजम खान की सुप्रीम कोर्ट में गुहार
ईडी के मामलों में जमानत की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान, कहा- 'मुझे जमानत चाहिए, वरना जेल में ही दम तोड़ दूंगा'।
- आजम खान ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के लिए लगाई गुहार।
- ईडी (ED) से जुड़े मामलों को लेकर हाईकोर्ट पहुंची कानूनी लड़ाई।
- लंबे समय से जेल में बंद सपा नेता की बिगड़ती सेहत पर चर्चा।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 05 नवंबर: उत्तर प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता और समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के संस्थापक सदस्यों में शुमार आजम खान (Azam Khan) की कानूनी मुश्किलें और व्यक्तिगत पीड़ा एक बार फिर देश की सबसे बड़ी अदालत के सामने आई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज किए गए मनी लॉन्ड्रिंग और विभिन्न अन्य मामलों में लंबे समय से जेल में बंद आजम खान ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी जमानत याचिका को लेकर गुहार लगाई है। सुनवाई के दौरान उनके वकीलों ने उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति और लंबे कारावास का हवाला देते हुए अदालत से जल्द राहत की अपील की है।
सूत्रों के अनुसार, कानूनी प्रक्रियाओं और मुवक्किल की व्यथा को रखते हुए अदालत के समक्ष यह बात भी आई कि वरिष्ठ नेता शारीरिक और मानसिक रूप से काफी प्रताड़ित महसूस कर रहे हैं और उन्होंने कानूनी लड़ाई के बीच अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि उन्हें जल्द न्याय नहीं मिला, तो वे जेल में ही दम तोड़ देंगे।
ईडी के मामलों और कानूनी पेचीदगियों का सफर
आजम खान पिछले कुछ वर्षों से रामपुर और अन्य जिलों में दर्ज जमीनों की अवैध कब्जा, फर्जी दस्तावेजों और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दर्जनों मामलों का सामना कर रहे हैं। इनमें से कई मामलों में उन्हें स्थानीय और उच्च न्यायालयों से जमानत मिल चुकी है, लेकिन प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज किए गए मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों के कारण उनकी कानूनी मुश्किलें अभी भी बनी हुई हैं।
निचली अदालतों और इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) से राहत न मिलने के बाद अब उनके वकीलों ने सीधे तौर पर सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का रुख किया है। सुप्रीम कोर्ट में इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्तिगण दोनों पक्षों की दलीलों को बारीकी से सुन रहे हैं। बचाव पक्ष के वकीलों का तर्क है कि आजम खान एक वरिष्ठ नागरिक हैं, गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और वे जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं, इसलिए उन्हें मानवीय आधार पर जमानत दी जानी चाहिए।
राजनीतिक गलियारों में हलचल और प्रतिक्रियाएं
आजम खान के इस बयान और सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई ने उत्तर प्रदेश सहित राष्ट्रीय राजनीति का पारा एक बार फिर गर्म कर दिया है। समाजवादी पार्टी और विपक्षी दलों का आरोप है कि राजनीतिक प्रतिशोध के तहत वरिष्ठ नेताओं को लंबे समय तक जेल में बंद रखने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल और प्रशासनिक पक्षों का कहना है कि न्यायपालिका स्वतंत्र रूप से काम कर रही है और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही सभी निर्णय लिए जा रहे हैं। अदालतों में चल रही इन कानूनी बहसों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि सर्वोच्च न्यायालय प्रवर्तन निदेशालय के मामलों में आजम खान को क्या राहत प्रदान करता है।
निष्कर्ष
आजम खान की यह कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट में दी गई उनकी दुहाई इस बात का प्रतीक है कि न्याय पाने की प्रक्रिया कितनी लंबी और संघर्षपूर्ण हो सकती है। अब देश की शीर्ष अदालत के आगामी निर्णयों पर ही यह निर्भर करेगा कि उन्हें इस मामले में कितनी राहत मिलती है।