सियासत में क्या झटका, क्या हलाल?
राकेश अचल
सियासत बडी हरजाई है।कभी सिर बैठाती है तो कभी ऐसी रूठ जाती है कि मिट्टी में मिला देती है।धनतेरस पर मुझे धन के बारे में लिखना चाहिए था लेकिन मैं लिख रहा हूँ सियासी झटकों और सियासी हलाला के बारे में।
धनतेरस तो हर साल आती है।अपने…
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