मैं कौन हूँ और आप कौन ?
माही अग्रवाल
जैसे यदि बात करूँ तो कुछ बातें इस तरह से कही जाती हैं जैसे अवधारणा के स्तर पर कोई बहुत बड़ी या भारी भरकम बात हो।
उदहारण के लिए लूँ तो- जैसे, मैं कौन हूँ "आप कौन हैं?" "हर क्षण हमें वर्तमान में जीना चाहिए!" "खुद में भरोसा…
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