केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई मीटिंग में शामिल नहीं होगी किसान-मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब, कोर कमेटी ने लिया फैसला

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समग्र समाचार सेवा
चंडीगढ़, 12 नवंबर।
पंजाब में कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है। किसान-मजदूर संघर्ष समिति पूरे पंजाब में कृषि कानूनों का विरोध कर रही है। इस आंदोलन के बीच केंद्र सरकार द्वारा कई किसान संगठनों को 13 नवंबर के दिन मीटिंग के लिए बुलाया गया है। इसी बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है कि इस मीटिंग में किसान-मजदूर संघर्ष समिति पंजाब शामिल नहीं होगी।

जानकारी के अनुसार किसान-मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब के प्रधान सतनाम सिंह पन्नू और प्रदेश महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि देर रात तक चली जत्थेबंदी की कोर कमेटी की मीटिंग में विचार करने के उपरांत 13 नवंबर को केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई मीटिंग में किसान-मज़दूर संघर्ष कमेटी पंजाब शामिल नहीं होगी।

उक्त नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार पहले मीटिंग के लिए अच्छा माहौल बनाए और पंजाब की आर्थिक नाकेबंदी को हटाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसान व श्रमिक वर्ग को गुमराह कर पंजाब के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। अब जब किसान रेल पटरियों व प्लेटफार्म खाली कर चुके हैं तो भी केंद्र सरकार पंजाब में मालगाड़ियां भेजने को तैयार नहीं है। यात्री गाड़ियों को चलाने की आड़ में केंद्र सरकार मालगाड़ियों को रोककर किसानों पर मानसिक दबाव डाल रही है।
किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रदेश महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा है कि कृषि कानूनों के खिलाफ जारी रेल रोको आंदोलन खत्म करने के बारे में 20 नवंबर को फैसला किया जाएगा। किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी की कोर कमेटी की बैठक 20 नवंबर को आयोजित की जा रही है, इसमें कमेटी के सभी पदाधिकारी व सदस्य शामिल होंगे। इस बैठक में रेलवे ट्रैक से धरना-प्रदर्शन खत्म करने पर विचार किया जाएगा।

वहीं इससे पहले बुधवार को किसान-मजदूर संघर्ष समिति के सदस्यों ने अमृतसर स्थित अंतरराज्यीय बस टर्मिनल में बसों पर काले झंडे और पोस्टर लगा दिए। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि पंजाब में इस साल किसान काली दिवाली मनाएंगे।

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