बीजेपी को बड़ा झटका: चार बार के सांसद राजेन गोहेन ने पार्टी से दिया इस्तीफा
पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री ने 30 साल पुराने रिश्ते तोड़े, सीधा निशाना साधा हिमंत बिस्वा सरमा नेतृत्व पर
-
चार बार नागांव से सांसद रहे गोहेन ने 17 समर्थकों के साथ दिया इस्तीफा
-
2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने से बढ़ी नाराज़गी
-
पार्टी में नए बनाम पुराने नेताओं की खींचतान को बताया असली कारण
-
बोले—“बीजेपी अब असमिया समाज की सबसे बड़ी दुश्मन बन चुकी है”
समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी, 10 अक्टूबर:असम के वरिष्ठ भाजपा नेता राजेन गोहेन का इस्तीफा
असम की राजनीति में बड़ा भूचाल तब आया जब भाजपा के वरिष्ठ नेता और चार बार नागांव से सांसद रह चुके राजेन गोहेन ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। 74 वर्षीय गोहेन ने गुरुवार दोपहर गुवाहाटी स्थित भाजपा मुख्यालय में अपने 17 समर्थकों के साथ औपचारिक रूप से पार्टी से नाता तोड़ लिया।
गोहेन, जो 1999 से 2019 तक नागांव लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे और 2016 में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री बने थे, ने अपने फैसले के पीछे पार्टी में बढ़ती अंतर्कलह और असमिया समुदाय की उपेक्षा को मुख्य कारण बताया। उनका कहना है कि पार्टी में अब उन नेताओं की उपेक्षा की जा रही है जिन्होंने लंबे समय तक भाजपा को खड़ा किया।
उन्होंने कहा, “मैं अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जैसे नेताओं से प्रेरित होकर पार्टी में आया था, लेकिन आज भाजपा की दिशा पूरी तरह बदल चुकी है। सत्ता में आने के बाद असमिया लोगों के हितों को पीछे धकेला गया है।”
गोहेन का गुस्सा 2023 के परिसीमन (delimitation) बाद और बढ़ गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि नागांव क्षेत्र की सीमाएं इस तरह बदली गई हैं कि अब “अल्पसंख्यक बहुलता के कारण भाजपा उम्मीदवार के लिए जीतना मुश्किल हो गया है।” इसी कारण उन्होंने असम खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था।
गोहेन ने यह भी कहा कि अहोम समुदाय, जिससे वे स्वयं आते हैं, राजनीतिक रूप से हाशिए पर चला गया है। उनके अनुसार, पहले जहां 30 से 40 विधानसभा सीटों पर अहोम समुदाय निर्णायक था, अब वह प्रभाव लगभग समाप्त हो गया है।
इससे पहले, अगस्त 2024 में, भाजपा के एक और वरिष्ठ नेता अशोक सरमा ने भी मतभेदों के चलते पार्टी छोड़ दी थी।
भाजपा की ओर से प्रवक्ता रंजीब कुमार सरमा ने गोहेन के कदम को “व्यक्तिगत निर्णय” बताते हुए कहा कि इसका राज्य के आगामी चुनावों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने जोड़ा कि पार्टी ने गोहेन को पर्याप्त सम्मान और पद दिए हैं, जिनमें मंत्री पद और कैबिनेट स्तर की जिम्मेदारी शामिल थी।
गौरतलब है कि असम में विधानसभा चुनाव अगले छह महीनों में होने वाले हैं और गोहेन का इस्तीफा भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक चुनौती बनकर उभर सकता है, विशेष रूप से नागांव और आसपास के इलाकों में।