गुरुग्राम से पुलवामा तक: सलमान की कार में ब्लास्ट, फरीदाबाद-आतंकी कनेक्शन पर जाँच तेज़
फरीदाबाद में मिले 2,900 किलो विस्फोटक से खुला दिल्ली धमाके का सुराग, गुरुग्राम की कार और पुलवामा लिंक ने बढ़ाई जांच एजेंसियों की चिंता
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लालकिला मेट्रो स्टेशन के पास धमाके में 10 की मौत, 30 घायल; कार में अमोनियम नाइट्रेट का शक।
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फरीदाबाद के धौज और फतेहपुर से 2,900 किलो विस्फोटक बरामद, 3 डॉक्टर गिरफ्तार।
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गुरुग्राम के सलमान की i20 कार पुलवामा के तारिक और फिर उमर उन नबी तक पहुंची।
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जैश-ए-मोहम्मद और IS-K एंगल की जांच, CCTV में मास्क पहना संदिग्ध डॉक्टर नजर आया।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 11 नवंबर:दिल्ली के लालकिला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर की शाम लगभग 6:50 बजे हुए भीषण विस्फोट में अब तक 10 लोगों की मौत और 30 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं। धमाके के बाद से सुरक्षा एजेंसियों की जांच में जो सुराग सामने आ रहे हैं, उन्होंने दिल्ली से लेकर फरीदाबाद और जम्मू-कश्मीर तक पूरे तंत्र को हिला दिया है।
फरीदाबाद कनेक्शन — भारी मात्रा में विस्फोटक बरामद
इस मामले की सबसे अहम कड़ी हरियाणा के फरीदाबाद जिले से जुड़ी है। 9 नवंबर को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद के धौज गांव में पुलवामा निवासी डॉ. मुजम्मिल शकील के किराए के कमरे पर छापा मारा। उसके कमरे से 360 किलो विस्फोटक और एक असॉल्ट राइफल बरामद हुई। इसके बाद पास के फतेहपुर तगा गांव में एक मौलाना के घर छापेमारी में 2,563 किलो संदिग्ध अमोनियम नाइट्रेट मिला। कुल मिलाकर अब तक करीब 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की जा चुकी है।
धमाके और इस बरामदगी के बीच सुरक्षा एजेंसियों को कई प्रत्यक्ष संबंध दिख रहे हैं। एजेंसियों का मानना है कि यह विस्फोट IED नहीं बल्कि अमोनियम नाइट्रेट आधारित ब्लास्ट हो सकता है। यह वही रसायन है जो खदानों में नियंत्रित विस्फोटों के लिए प्रयोग किया जाता है। फरीदाबाद में मिला 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट लगभग 100 मीटर के दायरे में तबाही मचाने में सक्षम है।
नारंगी धुएं से उठे सवाल
ब्लास्ट के बाद सामने आए वीडियो फुटेज में कार से निकलता नारंगी रंग का धुआं दिखाई दिया। जांच एजेंसियों के अनुसार, अमोनियम नाइट्रेट के विस्फोट के समय नाइट्रोजन ऑक्साइड और अमोनिया गैसें निकलती हैं, जो हवा में मिलकर नारंगी रंग का धुआं पैदा करती हैं। यही कारण है कि अब जांच का केंद्र बिंदु “अमोनियम नाइट्रेट” बन गया है। हालांकि, इसकी अंतिम पुष्टि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट से ही होगी।
चालान और संदिग्ध कार का सफर
धमाके में इस्तेमाल हुई हरियाणा नंबर की i20 कार अब जांच का केंद्र है। यह कार गुरुग्राम के मोहम्मद सलमान के नाम पर रजिस्टर्ड थी। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की है।
फरीदाबाद ट्रैफिक पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इसी कार का 20 सितंबर 2025 को तिकोना पार्क इलाके में गलत पार्किंग के लिए ₹1500 का चालान कटा था जो उस जगह से मात्र 25 किमी दूर है, जहाँ से डॉ. मुजम्मिल के घर से विस्फोटक मिला था।
सुरक्षा एजेंसियाँ अब इस संभावना की जांच कर रही हैं कि कहीं संदिग्धों ने छापेमारी के डर से विस्फोटक कार से किसी दूसरी जगह ले जाने की कोशिश तो नहीं की थी, या फिर वो इसे नष्ट करने के प्रयास में थे और रास्ते में हादसा हो गया।
एक तीसरा एंगल यह भी है कि शायद धमाका जानबूझकर किसी भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में किया गया ताकि बड़े पैमाने पर नुकसान हो, हालांकि इस संभावना को अभी कम माना जा रहा है क्योंकि विस्फोट के समय कार की स्पीड बहुत कम थी।
पुलवामा और गुरुग्राम का लिंक
जांच से यह भी सामने आया है कि ब्लास्ट वाली i20 कार कई बार बिकी। इसकी आरसी कॉपी में 18 मार्च 2014 की तारीख और सलमान का नाम दर्ज है। यह कार बाद में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के समबोरा गांव के तारिक नामक व्यक्ति को बेची गई थी। एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें कार के साथ खड़ा व्यक्ति तारिक बताया जा रहा है।
बाद में यह कार उमर उन नबी के पास पहुंची, जो पुलवामा के कोइल गांव का रहने वाला और फरीदाबाद की अलफलाह यूनिवर्सिटी से जुड़ा बताया जा रहा है। उमर वही यूनिवर्सिटी में काम करता था, जहाँ डॉ. मुजम्मिल शकील पढ़ाता था।
CCTV में मास्क पहना शख्स और डॉक्टरों का आतंकी मॉड्यूल
ब्लास्ट से पहले की CCTV फुटेज में i20 कार चलाता हुआ मास्क पहने एक व्यक्ति दिखाई दे रहा है, जिसे जांच एजेंसियाँ डॉ. उमर उन नबी मान रही हैं। जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार, यह मॉड्यूल चार डॉक्टरों का नेटवर्क था, जिनमें से तीन, जिनमें एक महिला डॉक्टर भी शामिल है, गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जबकि चौथा डॉ. उमर अभी फरार बताया जा रहा है।
एजेंसियों को संदेह है कि डॉ. उमर छापेमारी के डर से विस्फोटक लेकर किसी सुरक्षित जगह जा रहा था, लेकिन रास्ते में ब्लास्ट हो गया, या उसने गिरफ्तारी से बचने के लिए खुद को विस्फोट में झोंक दिया।
आतंकवादी एंगल: जैश-ए-मोहम्मद और ISKP की जाँच
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार धमाके का तरीका आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रोविंस (ISKP) की कार्यशैली से मेल खाता है। दोनों संगठन आत्मघाती हमलों (Suicide Bombers) का इस्तेमाल करते हैं। जांच एजेंसियाँ इस दिशा में भी सबूत तलाश रही हैं।
साथ ही, यह भी संभावना जताई जा रही है कि धमाका पहले किसी CNG कार में हुआ और उससे अमोनियम नाइट्रेट वाली i20 भी चपेट में आ गई। अमोनियम नाइट्रेट तभी विस्फोट करता है जब आग या उच्च तापमान के संपर्क में आए।
चश्मदीदों का बयान और मंजर
धमाके के वक्त इलाके में भारी ट्रैफिक था। यमुना पार्क निवासी चंद्रशेखर के मुताबिक, “दो बार धमाके की आवाज आई, आग की लपटें उठीं, और दूसरी गाड़ियाँ भी जलने लगीं।” उनके साथ मौजूद अभिजीत सिंह ने बताया, “यह सिलेंडर ब्लास्ट नहीं था, शव के टुकड़े सड़क पर बिखरे पड़े थे।”
पास के जैन मंदिर के कर्मचारी गिरिजेश सिंह ने बताया कि विस्फोट के बाद मंदिर के शीशे टूट गए और मंदिर परिसर में भी शरीर के हिस्से गिरे। उन्होंने कहा कि “एक सिर का हिस्सा मंदिर में गिरा था, जो किसी महिला का लग रहा था।”
तेज़ एक्शन और हाई अलर्ट
धमाके के लगभग 10 मिनट के भीतर ही दिल्ली क्राइम ब्रांच, स्पेशल सेल और लोकल पुलिस मौके पर पहुँच गईं। इसके बाद NIA, NSG और फोरेंसिक टीमों को भी बुलाया गया। दमकल की 10 गाड़ियाँ लगाई गईं और शाम 7:29 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया।
धमाके की आवाज ITO तक सुनाई दी, कई वाहनों के शीशे टूट गए।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा ने बताया कि कार में तीन लोग सवार थे। घायलों के शरीर पर पैलेट या छेद के निशान नहीं मिले, जो सामान्य बम धमाकों में होते हैं, यही बात इस विस्फोट को पारंपरिक IED से अलग करती है।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि “सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर गहन जांच की जाएगी।”
केस दर्ज और देशभर में अलर्ट
दिल्ली पुलिस ने इस घटना में UAPA (धारा 16 और 18), विस्फोटक अधिनियम और BNS की धाराओं के तहत कोतवाली थाने में केस दर्ज किया है।
अभी तक किसी भी आतंकी संगठन ने इस धमाके की जिम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारों ने इसे “संदिग्ध आतंकी गतिविधि” मानते हुए दिल्ली, हरियाणा, यूपी, राजस्थान, बिहार, पंजाब, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तराखंड में हाई अलर्ट जारी किया है। हैदराबाद में भी पुलिस ने गश्त बढ़ा दी है।
आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़
जम्मू-कश्मीर और हरियाणा पुलिस पिछले 15 दिनों से संयुक्त अभियान चला रही थीं। इस दौरान हरियाणा से लेकर यूपी के लखनऊ और सहारनपुर तक कार्रवाई की गई।
- फरीदाबाद से डॉ. मुजम्मिल शकील (अलफलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद)
- लखनऊ से डॉ. शाहीन शाहिद
- सहारनपुर से डॉ. आदिल अहमद (अनंतनाग निवासी)
- मौलाना इस्ताक (फतेहपुर तगा गांव) को गिरफ्तार किया गया।
डॉ. शाहीन, डॉ. मुजम्मिल की करीबी बताई जा रही हैं, जिनकी कार का इस्तेमाल विस्फोटक ले जाने में किया गया। मुजम्मिल ने फरीदाबाद के धौज गांव में तीन महीने पहले एक कमरा किराए पर लिया था, जहाँ विस्फोटक सामग्री रखी गई थी।
डॉ. आदिल पहले अनंतनाग के मेडिकल कॉलेज में कार्यरत था, लेकिन 2024 में नौकरी छोड़कर सहारनपुर में प्रैक्टिस कर रहा था। पुलिस का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क जैश-ए-मोहम्मद और अंसर गजवात-उल-हिंद जैसे आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ है।
कुल मिलाकर, जांच एजेंसियाँ अब फरीदाबाद से पुलवामा और दिल्ली तक फैले इस जाल को सुलझाने की कोशिश में हैं।
हर कड़ी चाहे वो चालान हो, सीसीटीवी फुटेज हो, विस्फोटक की बरामदगी हो या गिरफ्तार डॉक्टर एक बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है।
फिलहाल, एजेंसियों का फोकस अमोनियम नाइट्रेट की पुष्टि, आतंकी संगठनों के कनेक्शन, और कार की मूवमेंट पर है।
फोरेंसिक रिपोर्ट ही यह तय करेगी कि दिल्ली के दिल में हुआ यह धमाका हादसा था, या एक योजनाबद्ध आतंकी हमला।