पूनम शर्मा
केरल के मलप्पुरम जिले में ‘विषु’ पर्व के दौरान एक विज्ञापन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 192 के तहत दो प्रतिष्ठानों—अरबियन मजलिस और रैदन रेस्टोरेंट—के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आरोप है कि इन रेस्टोरेंट्स ने भगवान कृष्ण की छवि के साथ मांस से जुड़े विज्ञापन जारी किए, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
‘विषु’ केरल का एक महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार है, जिसे खास तौर पर भगवान कृष्ण से जोड़ा जाता है। इस अवसर पर लोग पूजा-अर्चना करते हैं और शुभ कार्यों की शुरुआत करते हैं। ऐसे में भगवान कृष्ण की छवि का उपयोग मांसाहारी भोजन के प्रचार के लिए किया जाना कई लोगों को आपत्तिजनक लगा।
स्थानीय लोगों और कुछ सामाजिक संगठनों ने इस विज्ञापन का कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि यह न केवल धार्मिक भावनाओं का अपमान है, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों के भी खिलाफ है। विरोध के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित रेस्टोरेंट्स के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शिकायत में यह कहा गया है कि विज्ञापन में भगवान कृष्ण की तस्वीर के साथ मांसाहारी व्यंजन को प्रमोट किया गया, जो कि एक विशेष समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। जांच के दौरान यह भी देखा जा रहा है कि क्या यह विज्ञापन जानबूझकर बनाया गया था या फिर यह एक मार्केटिंग की गलती थी।
दूसरी ओर, रेस्टोरेंट प्रबंधन ने सफाई देते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करना नहीं था। उन्होंने इसे एक “अनजाने में हुई त्रुटि” बताया और विवाद बढ़ने के बाद विज्ञापन को हटा लिया है। साथ ही, उन्होंने सार्वजनिक रूप से माफी भी मांगी है।
यह मामला अब सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल रहा है, जहां लोग इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ रहे हैं, तो कुछ इसे धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन के रूप में देख रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 192 के तहत यदि यह साबित होता है कि किसी ने जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, तो संबंधित व्यक्तियों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और संबंधित पक्षों से पूछताछ की जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि विज्ञापन और मार्केटिंग में धार्मिक प्रतीकों का उपयोग किस सीमा तक किया जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद ने केरल सहित देशभर में चर्चा को जन्म दे दिया है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाए जाएंगे।