समग्र समाचार सेवा
महाराष्ट्र, २ मई: टीसीएस नासिक मामलें में 27 अप्रैल को आरोपी निदा खान की जमानत याचिका के मामले मे सुनवाई के दौरान कई चौकानें वालें खुलासे सामने आए।
कॉर्पोरेट ऑफिस में काम कर रहीं लड़कियों पर जबरन बुर्का और हिजाब पहनने का दबाव बनाया जाता था ।
अनुसूचित जन जाति और गरीब को जिहाद का शिकार बनाया जाता था
अनुसूचित जन जाति और गरीब लड़कियों को अपनी जाल में फसाते थे
और कलमा पढने के लिए मजबूर करते थे चौंकाने वाली बात यह है की आरोपी लड़कियों को ही नही बल्कि साथ में काम कर रहे लड़को को भी अपना शिकार बनाते थे।
धर्म परिवर्तन कराकर मलेशिया भेजने की तैयारी
कॉर्पोरेट ऑफिस में काम कर रहीं पीड़िता ने बताया की कैसे उसे धर्म परिवर्तन के लिए उसका ब्रेनवॉश किया गया । आरोपी निदा खान ने उस हिंदु लड़की का नाम बदलकर मुस्लिम नाम हानिया रख दिया और लड़की का धर्म परिवर्तन कराकर उसे मलेशिया भेजने का झांसा देकर रही थी।
दानिश शेख ने हिंदु युवक को कलमा पढ़ने पर दबाव बनाया
कॉर्पोरेट जगत में मैनेजर के पद पर कार्यरत दानिश शेख ने अपने साथ काम कर रहे हिंदु युवक को ईद के मौके पर अपने घर ले जाकर कलमा पढने पर दबाव बना रहा था ।
निदा खान है कॉर्पोरेट ऑफिस के जिहाद की मास्टरमाइंड
कॉर्पोरेट जगत में काम कर रहें सीनियर दानिश शेख, निदा खान और तौसीफ तीनों आरोपी धर्म परिवर्तन के साथ लड़कियों का शारीरिक शोषण भी करते थे। मैनेजर निदा खान है मास्टरमाइंड।
टीसीएस केस 9 एफआईआर दर्ज
महाराष्ट्र के नासिक में टीसीएस के बीपीओ यूनिट में महिला कर्मचारियों ने अपने मुस्लिम धर्म के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न, जबरन धर्मांतरण और ‘कॉर्पोरेट ग्रूमिंग’ (फंसाने की साजिश) के गंभीर आरोप में 9 एफआईआर दर्ज करा चुकी हैं।महिला कर्मचारियों ने शिकायत की है कि सीनियर दानिश शेख और तौसीफ उन्हें निजी जिंदगी में दखल देकर, शादी का झांसा देकर, और नशीला पदार्थ देकर उनका शोषण करते थे, साथ ही धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालते थे।
कॉर्पोरेट ग्रूमिंग
यह एक ऐसी रणनीति बताई जा रही है जिसमें वरिष्ठ अधिकारी अपने पद का फायदा उठाकर महिला कर्मचारियों को मानसिक रूप से नियंत्रित करते हैं और फिर यौन/धार्मिक शोषण करते हैं।
TCS धर्मांतरण केस मे जांच जारी
इस घटना के बाद कंपनी के कामकाज और कर्मचारी सुरक्षा पर कई तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं। पुलिस की विशेष जांच टीम इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।लेकिन 17 अप्रैल को जारी बयान में टीसीएस ने कहा, “नासिक ऑफिस से जुड़े सिस्टम और रिकॉर्ड की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि इस तरह के आरोपों से संबंधित कोई शिकायत हमारी एथिक्स या प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट कमेटी को नहीं मिली है।