राष्ट्रीय जल सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम: जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को मिलेगा नया बल

जल शक्ति मंत्रालय की राष्ट्रीय कार्यशाला में MAHA on Water, भारत-WIN स्टार्टअप कॉल और JSJB: Catch the Rain पोर्टल का शुभारंभ

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  • जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन
  • MAHA on Water मिशन का शुभारंभ
    भारत-WIN के तहत स्टार्टअप्स और MSMEs के लिए ओपन कॉल लॉन्च
  • JSJB: Catch the Rain Portal का शुभारंभ
    जल शक्ति मंत्रालय और ISRO के बीच महत्वपूर्ण MoU पर हस्ताक्षर
  • 500 से अधिक विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और नीति निर्माताओं की भागीदारी
  •  विकसित भारत 2047 के लिए जल सुरक्षा और जलवायु लचीलापन पर जोर
  • जल सुरक्षा के लिए अनुसंधान, तकनीक और जनभागीदारी आवश्यक: सी.आर. पाटिल

समग्र समाचार सेवा
दिल्ली, २ जून: नई दिल्ली में आयोजित जल क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर राष्ट्रीय कार्यशाला में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री ची. आर पाटिल ने कहा कि “जल हमारी सभ्यता और विकास की पहचान है।” उन्होंने जल संकटों से निपटने के लिए अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और जनभागीदारी को तीन प्रमुख स्तंभ बताया।

उन्होंने जानकारी दी कि जल क्षेत्र में अब तक 315 से अधिक अनुसंधान परियोजनाएं शुरू की गई हैं, जिनमें 113 परियोजनाओं को सीधे मंत्रालय का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने यह भी बताया कि जल संचय जन भागीदारी अभियान के तहत देशभर में 1.5 करोड़ से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं की सूचना दर्ज की गई है।


MAHA on Water मिशन और स्टार्टअप नवाचार को बढ़ावा
कार्यशाला में MAHA on Water (Mission for Advancement in High-Impact Areas for Water) का शुभारंभ किया गया। यह पहल सरकार, शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों, उद्योगों और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देगी।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार, उद्योग, MSMEs, स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों का संयुक्त प्रयास आवश्यक है। उन्होंने जल क्षेत्र के लिए ANRF और जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संयुक्त अनुसंधान आह्वान (Research Call) की भी घोषणा की।
ISRO के साथ साझेदारी से मिलेगा तकनीकी बल
कार्यशाला के दौरान जल शक्ति मंत्रालय और Indian Space Research Organisation के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत उपग्रह आधारित अवलोकन, रिमोट सेंसिंग और जियोस्पेशियल तकनीकों का उपयोग जल संसाधनों की योजना, निगरानी और प्रबंधन में किया जाएगा।
ISRO अध्यक्ष V. Narayanan ने कहा कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और भू-स्थानिक डेटा जल संसाधन प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

JSJB: Catch the Rain पोर्टल का शुभारंभ
कार्यशाला में Jal Sanchay Jan Bhagidari: Catch the Rain (JSJB:CTR) Portal भी लॉन्च किया गया। यह मंच नागरिकों, उद्योगों, गैर-सरकारी संगठनों और सरकारी एजेंसियों को जल संरक्षण गतिविधियों में भागीदारी और सूचना साझा करने का अवसर प्रदान करेगा।
जलवायु परिवर्तन और जल प्रबंधन पर हुई विस्तृत चर्चा
तकनीकी सत्रों में हिमालयी क्षेत्रों, नदी घाटियों, भूजल-निर्भर क्षेत्रों, तटीय इलाकों और शहरी केंद्रों से जुड़े जल संबंधी मुद्दों पर चर्चा हुई। जलवायु परिवर्तन, भूजल संरक्षण, सिंचाई दक्षता, जल गुणवत्ता, बाढ़ एवं सूखा प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।


कार्यशाला के निष्कर्षों को भविष्य की जल अनुसंधान नीतियों, निवेश योजनाओं और तकनीकी नवाचारों का मार्गदर्शक माना जा रहा है, जो भारत को जल सुरक्षा, जलवायु लचीलापन और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर अग्रसर करेंगे।

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