- उच्चतम न्यायालय ने गृहिणियों को ‘राष्ट्र निर्माता’ के रूप में मान्यता देने की आवश्यकता पर बल दिया।
- सड़क दुर्घटना मुआवज़ा निर्धारण में गृहिणियों के अवैतनिक कार्य का मूल्य कम से कम ₹30,000 प्रतिमाह माना जाना चाहिए।
- न्यायालय ने कहा कि ‘होममेकर’ शब्द गृहिणियों के योगदान को कम करके दर्शाता है।
- पंजाब के एक सड़क दुर्घटना मामले की अपील की सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की गई।
- गृहिणियों के योगदान की मान्यता पर ऐतिहासिक टिप्पणी
- सड़क दुर्घटना मुआवज़े के निर्धारण में गृहिणियों के अवैतनिक श्रम का मूल्य न्यूनतम ₹30,000 प्रतिमाह माना जाए
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 12 जून: Supreme Court of India ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि गृहिणियों को केवल ‘होममेकर’ कहकर सीमित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि परिवार और भावी पीढ़ियों के निर्माण में उनकी भूमिका को देखते हुए उन्हें ‘राष्ट्र निर्माता’ के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।
मुआवज़े की गणना में अवैतनिक श्रम का महत्व
न्यायालय ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु या गंभीर चोट के मामलों में मुआवज़ा निर्धारित करते समय गृहिणियों द्वारा किए जाने वाले अवैतनिक घरेलू कार्यों के आर्थिक मूल्य को उचित मान्यता मिलनी चाहिए। अदालत के अनुसार, ऐसे मामलों में गृहिणी की अनुमानित मासिक आय कम से कम ₹30,000 मानी जानी चाहिए।
पंजाब के सड़क दुर्घटना मामले में सुनाया गया फैसला
यह टिप्पणी पंजाब के एक सड़क दुर्घटना मामले से संबंधित अपील की सुनवाई के दौरान की गई। वर्ष 2001 के नवंबर महीने में हुई एक सड़क दुर्घटना में एक महिला की मृत्यु हो गई थी। उनकी मृत्यु के बाद उनके पति और तीन बच्चों ने मुआवज़े की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
न्यायालय ने कहा कि गृहिणियों का दैनिक श्रम, परिवार का प्रबंधन और बच्चों के पालन-पोषण में उनका योगदान समाज और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए अत्यंत मूल्यवान है। इसलिए उनके कार्य को उचित सम्मान और आर्थिक मान्यता मिलना समय की मांग है।