- प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम में 3 नए चूजों का जन्म।
- एक चूजा जंगल से एकत्र किए गए अंडे से तथा दो चूजे बंदी अवस्था में दिए गए अंडों से निकले।
- बंदी प्रजनन कार्यक्रम के चौथे वर्ष में अब तक कुल 26 चूजों का जन्म।
- 18 चूजे कृत्रिम प्रजनन, 4 प्राकृतिक प्रजनन तथा 4 जंगली अंडों से जन्मे।
- राजस्थान में ‘जंपस्टार्ट’ हस्तक्षेप के तहत प्राकृतिक आवास में भी 3 चूजों का सफल जन्म।
- संरक्षण केंद्रों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की संख्या बढ़कर 94 हुई।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 15 जून: भारत के अत्यंत संकटग्रस्त पक्षी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के संरक्षण प्रयासों को एक बड़ी सफलता मिली है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री Bhupender Yadav ने जानकारी दी कि प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम में 3 नए चूजों का सफलतापूर्वक जन्म हुआ है।
बंदी प्रजनन कार्यक्रम के चौथे वर्ष में 26 चूजों का जन्म
मंत्री के अनुसार, कार्यक्रम के चौथे वर्ष में अब तक कुल 26 चूजों का जन्म दर्ज किया गया है। इनमें—
18 चूजे कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) के माध्यम से,
4 चूजे प्राकृतिक प्रजनन से,
तथा 4 चूजे जंगल से एकत्र किए गए अंडों से जन्मे हैं।
राजस्थान में प्राकृतिक आवास में भी मिली सफलता
मंत्री ने बताया कि जंगली अंडों के संग्रह के बदले राजस्थान में ‘जंपस्टार्ट इंटरवेंशन’ पहल के तहत प्राकृतिक आवास में भी 3 चूजों का सफल जन्म हुआ है। इस पहल का उद्देश्य प्रजाति की आनुवंशिक विविधता को बढ़ाना तथा नवजात चूजों को शिकारी जीवों के खतरे से सुरक्षित रखना है।
संरक्षण केंद्रों में संख्या बढ़कर 94 हुई
वर्तमान में विभिन्न बंदी संरक्षण केंद्रों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की संख्या बढ़कर 94 हो गई है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस प्रजनन सत्र के दौरान और भी चूजों का जन्म हो सकता है।
संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
विश्व की सबसे संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों में शामिल ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए यह उपलब्धि एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि संरक्षण प्रजनन और प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापन के संयुक्त प्रयास इस दुर्लभ प्रजाति के दीर्घकालिक संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।