नगांव लोकसभा उपचुनाव में मेहदी आलम बोरा को उम्मीदवार बनाने की मांग
40 लाख स्वदेशी मुसलमानों के राजनीतिक अधिकारों से वंचित होने का आरोप
- नगांव लोकसभा उपचुनाव में मेहदी आलम बोरा को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाने की मांग।
- ऊपरी असम मुस्लिम कल्याण परिषद ने यह मांग उठाई।
- असम के लगभग 40 लाख स्वदेशी मुसलमान राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित होने का आरोप।
- स्वदेशी मुस्लिम समाज को उचित राजनीतिक सम्मान और प्रतिनिधित्व देने की अपील।
- सभी राजनीतिक दलों से समावेशी राजनीति अपनाने का आग्रह।
- स्वदेशी मुस्लिम समाज के प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर ऊपरी असम मुस्लिम कल्याण परिषद की पहल
समग्र समाचार सेवा
नगांव, 18 जून: नगांव लोकसभा क्षेत्र में संभावित उपचुनाव को लेकर ऊपरी असम मुस्लिम कल्याण परिषद ने एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मांग उठाई है। संगठन ने कांग्रेस पार्टी से नगांव लोकसभा उपचुनाव में मेहदी आलम बोरा को उम्मीदवार के रूप में नामित करने का आग्रह किया है।
परिषद के अनुसार, असम का स्वदेशी मुस्लिम समाज लंबे समय से राज्य की राजनीतिक व्यवस्था में उचित प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं कर पाया है। संगठन का दावा है कि लगभग 40 लाख स्वदेशी मुसलमान आज भी निर्णय लेने की प्रक्रिया तथा निर्वाचित प्रतिनिधित्व के स्तर पर उपेक्षित हैं।
मेहदी आलम बोरा को उम्मीदवार बनाने के पक्ष में तर्क
परिषद का कहना है कि मेहदी आलम बोरा लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। संगठन का मानना है कि उनकी उम्मीदवारी स्वदेशी मुस्लिम समाज की आशाओं और आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करेगी तथा व्यापक समाज में एक सकारात्मक संदेश पहुंचाएगी।
समावेशी राजनीति की अपील
ऊपरी असम मुस्लिम कल्याण परिषद ने सभी राजनीतिक दलों से जातीय, सामुदायिक और सामाजिक समावेशन को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है। परिषद का कहना है कि राज्य के समग्र विकास और सामाजिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए सभी समुदायों को न्यायसंगत राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना आवश्यक है।
नगांव लोकसभा उपचुनाव को लेकर उठी इस मांग ने असम के स्वदेशी मुस्लिम समाज की राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दल इस मांग पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।