CNFF-2026: भारतीय विरासत और राष्ट्रभाव का राष्ट्रीय फिल्म मंच

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  • 24-25 अक्टूबर 2026 को गुवाहाटी में होगा CNFF का 10वां संस्करण।
  • भारतीय विरासत, राष्ट्रभाव और सामाजिक सरोकारों पर आधारित फिल्मों को मिलेगा मंच।
  • नॉर्थ-ईस्ट और ऑल इंडिया श्रेणियों में कुल 7 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
  • युवा एवं पेशेवर दोनों फिल्मकारों के लिए प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर।

समग्र समाचार सेवा
गुवाहाटी,असम 29 जून: भारतीय संस्कृति, सभ्यता, विरासत और राष्ट्रभाव पर आधारित फिल्मों को प्रोत्साहित करने वाला चलचित्रम नेशनल फिल्म फेस्टिवल (CNFF)-2026 इस वर्ष 24 और 25 अक्टूबर को गुवाहाटी के कहिलीपाड़ा स्थित ज्योति चित्रबन फिल्म सोसाइटी परिसर में आयोजित होगा। विश्व संवाद केंद्र-असम की सहयोगी संस्था चलचित्रम द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का उद्देश्य युवा फिल्मकारों को सामाजिक परिवर्तन, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय एकता जैसे विषयों पर सार्थक सिनेमा बनाने के लिए प्रेरित करना है।

भारतीय विरासत और सामाजिक विषयों पर रहेगा विशेष फोकस

वर्ष 2017 में गुवाहाटी फिल्म फेस्टिवल के रूप में शुरू हुए इस आयोजन को 2019 में नया स्वरूप देते हुए “Our Heritage Our Pride” थीम के साथ चलचित्रम नेशनल फिल्म फेस्टिवल का नाम दिया गया। महोत्सव में भारतीय विरासत, स्वतंत्रता संग्राम के नायक, राष्ट्रीय एकता, योग, आयुर्वेद, महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण, लोक संस्कृति, हस्तशिल्प, पारिवारिक मूल्य, पर्यटन, पारंपरिक खेल, सामाजिक सुधार, चाय एवं तेल उद्योग सहित अनेक विषयों पर आधारित लघु फिल्में और डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की जाएंगी।

प्रविष्टियों के लिए निर्धारित नियम

फिल्मों की अवधि 1 से 25 मिनट के बीच होनी चाहिए तथा उनका निर्माण 1 सितंबर 2025 से 1 सितंबर 2026 के बीच हुआ होना आवश्यक है। नॉर्थ-ईस्ट और ऑल इंडिया श्रेणी में कुल सात पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे। अर्ली बर्ड प्रविष्टियां निःशुल्क हैं, जबकि नियमित और अंतिम चरण में क्रमशः 500 और 1,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इच्छुक प्रतिभागी अपनी प्रविष्टियां ई-मेल अथवा फिल्मफ्रीवे के माध्यम से भेज सकते हैं।

पिछले संस्करण में सामाजिक मुद्दों की रही प्रभावशाली प्रस्तुति

पिछले संस्करण में 30 से अधिक लघु फिल्मों और डॉक्यूमेंट्री में वृद्धावस्था का अकेलापन, बदलते पारिवारिक मूल्य, जातिगत भेदभाव, दिव्यांग बच्चों का जीवन, मातृसत्तात्मक समाज, पारंपरिक कठपुतली कला, वस्त्र विरासत, पर्यावरण संरक्षण तथा युवाओं की मानसिक चुनौतियों जैसे विषयों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। आयोजन समिति का मानना है कि यह महोत्सव न केवल उभरते फिल्मकारों को मंच देगा, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक उत्तरदायित्व को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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