समग्र समाचार सेवा
मध्य प्रदेश 6 जुलाई : मध्य प्रदेश के जिला न्यायाधीश अजय कुमार द्विवेदी इन दिनों अपने अभूतपूर्व फैसलों और सादगीपूर्ण जीवनशैली के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने न केवल सरकारी बंगला और आधिकारिक कार लेने से इनकार किया, बल्कि अपनी सैलरी आधी करने की भी मांग की है।जज द्विवेदी वर्तमान में छिंदवाड़ा में पदस्थ हैं और खुद खाना बनाते हैं, पैदल चलकर कोर्ट जाते हैं और एक साधारण कक्ष में रहते हैं।
उनके पास बेहद सीमित निजी संपत्ति है, जिसमें उनकी मां द्वारा दिया गया मोबाइल ही एकमात्र खास वस्तु है। उन्होंने अविवाहित रहने का विकल्प चुना है और प्रशासन को बताया है कि वे केवल न्यूनतम आवश्यक सुविधाओं के साथ, कहीं भी सेवा देने को तैयार हैं।इन फैसलों के पीछे उनकी मां की कानूनी लड़ाई से मिली प्रेरणा है। बचपन में उन्होंने देखा कि भूमि विवाद के दौरान उनकी मां को वर्षों तक कोर्ट के चक्कर काटने पड़े, जिससे आर्थिक और मानसिक तनाव झेलना पड़ा।
यही अनुभव उन्हें न्यायिक सेवा में लाया और आज वे मामलों को तेजी से सुलझाने पर जोर देते हैं, खासकर भूमि और संपत्ति विवादों में।उनके इस फैसले ने सोशल मीडिया पर व्यापक सराहना पाई है। लोग उन्हें सच्चे न्याय और सार्वजनिक सेवा का प्रतीक मान रहे हैं। उनका मानना है कि लोकसेवा एक जिम्मेदारी है, न कि विशेषाधिकार।इस कहानी ने न केवल न्यायिक व्यवस्था में भरोसा बढ़ाया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा आज भी समाज में गहरी छाप छोड़ सकती है। जज द्विवेदी का यह उदाहरण कई लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है