- SBI मैनेजर की 35 लाख ग्रॉस सैलरी वायरल, सोशल मीडिया पर बहस
- ग्रॉस सैलरी में एकमुश्त लाभ और कई तरह की कटौतियों के कारण फर्क
- टेक-होम वेतन टैक्स, NPS, EPF और लोन की किश्तों के बाद ही तय होता है
- SBI में 1500 नए प्रॉबेशनरी ऑफिसर की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली 8 जुलाई : सोशल मीडिया पर हाल ही में एक SBI मैनेजर की 35.24 लाख रुपये सालाना ग्रॉस सैलरी की चर्चा जोरों पर है। एक वायरल पोस्ट में उनके फॉर्म 16 का ब्रेकअप शेयर किया गया, जिससे सरकारी बैंक कर्मचारियों के वेतन और टेक-होम सैलरी में असल अंतर को लेकर बहस छिड़ गई है।
पोस्ट अनुसार, यह मैनेजर आठ साल पहले प्रॉबेशनरी ऑफिसर बने थे और अब स्केल 3 मैनेजर हैं। फॉर्म 16 में दर्शाया गया वार्षिक वेतन कई लोगों को चौंकाने वाला लगा, लेकिन पोस्ट में यह भी बताया गया कि इसमें लीव फेयर कंसेशन (LFC) और लीव एनकैशमेंट जैसी वन-टाइम पेमेंट शामिल हैं, जो हर चार साल में एक बार मिलती हैं। ये रकम नियमित मासिक वेतन का हिस्सा नहीं होती।
वास्तविकता यह है कि टैक्स, नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS), EPF और होम/कार/टू-व्हीलर लोन की किश्तों के बाद हर महीने खाते में आने वाली रकम काफी कम रह जाती है। कई यूजर्स ने लिखा, “35 लाख ग्रॉस दिखता अच्छा है, लेकिन कटौतियों और एकमुश्त लाभ के बाद असली टेक-होम कहीं कम है।”
कुछ लोगों का मानना था कि इतनी बड़ी सालाना सैलरी आज भी आकर्षक है, जबकि अन्य ने जिम्मेदारियों और वास्तविक मासिक वेतन के आधार पर नौकरी का मूल्यांकन करने की सलाह दी।