कर्नाटक: हाईकोर्ट ने सिविल कोर्ट संशोधन अधिनियम 2023 को मंजूरी दी

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  • वरिष्ठ सिविल जजों के डिक्री व आदेशों की पहली अपील अब जिला अदालतों में ही दाखिल होगी।
  • संशोधन का विगत प्रभाव सिर्फ लंबित अपीलों पर लागू, निपट चुके मामलों पर नहीं।
  • बेंगलुरु सिटी सिविल कोर्ट के मामलों की अपीलें अब भी हाईकोर्ट में सुनी जाएंगी।
  • संशोधन का उद्देश्य हाईकोर्ट का बोझ कम कर न्याय को जनता के निकट लाना।

समग्र समाचार सेवा

बेंगलुरु,कर्नाटक, 10 जुलाई : कर्नाटक हाईकोर्ट ने बुधवार को एक अहम फैसले में 2023 के उस कानून को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया, जिसके तहत वरिष्ठ सिविल जजों के आदेशों और डिक्री के खिलाफ पहली अपीलें अब जिला अदालतों में दाखिल होंगी। पहले 10 लाख रुपये से अधिक मूल्य के मामलों की अपीलें सीधे हाईकोर्ट में जाती थीं, लेकिन 2023 के संशोधन के बाद अब ये सभी अपीलें जिला अदालतों में ही सुनवाई के लिए जाएंगी।
मुख्य न्यायाधीश विभु बखरू और जस्टिस सीएम पूनाचा की बेंच ने साफ किया कि हालांकि संशोधन अधिनियम को 28 अगस्त 2007 से लागू करने का प्रावधान है, लेकिन इसका विगत प्रभाव केवल उन्हीं अपीलों पर होगा जो अभी भी लंबित हैं। पहले से निपट चुकी अपीलों या जिन मामलों में अंतिम आदेश आ चुका है, उन पर यह संशोधन लागू नहीं होगा। साथ ही, जिन मामलों में 3 जुलाई 2024 के हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के चलते कार्यवाही चल रही थी, वे भी कानूनी रूप से मान्य मानी जाएंगी।

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि अपील के लिए हाईकोर्ट में सुनवाई का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और संशोधन का विगत प्रभाव पुराने निर्णयों को अवैध बना देगा। राज्य सरकार ने अपने पक्ष में तर्क दिया कि यह कदम हाईकोर्ट पर लंबित मामलों का बोझ कम करने और ‘न्याय आपके द्वार’ के उद्देश्य से उठाया गया है। कोर्ट ने भी माना कि अपील का अधिकार तो मौलिक है, लेकिन किस मंच पर सुनी जाएगी, यह प्रक्रिया का हिस्सा है और प्रक्रियागत संशोधन सामान्यत: विगत प्रभावी होते हैं, जब तक कानून में स्पष्ट रूप से अन्यथा न कहा गया हो।

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