CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, यूपी और ट्रस्ट को नोटिस जारी किया
अयोध्या राम मंदिर दान
- नोटिस में शामिल: केंद्र, यूपी सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट।
- याचिकाओं की मांग: CBI जांच, ट्रस्ट की फोरेंसिक ऑडिट, सभी वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और पारदर्शिता।
- कोर्ट का निर्देश: SIT जांच की पूरी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में पेश की जाए।
- पारदर्शिता पर ज़ोर: याचिका में ट्रस्ट को वेबसाइट पर वित्तीय विवरण सार्वजनिक करने, बिना निगरानी समिति की स्वीकृति के कोई बड़ा वित्तीय निर्णय न लेने का आग्रह।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 13 जुलाई :मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने की। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि दान की रकम के दुरुपयोग की आशंका से श्रद्धालुओं में चिंता है, इसलिए वित्तीय रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और डिजिटल डेटा संरक्षित किया जाए।
याचिकाओं में यह भी मांग की गई है कि ट्रस्ट के सभी लेन-देन, UPI लॉग, बैंक स्टेटमेंट्स आदि का स्वतंत्र एजेंसी से फोरेंसिक ऑडिट कराया जाए और जब तक जांच पूरी न हो, कोई बड़ा निवेश या अनुबंध ट्रस्ट न करे। साथ ही, ट्रस्ट को सभी दान और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक करने को भी कहा गया है।
कोर्ट ने कहा कि जांच जारी है और उचित समय पर याचिकाकर्ताओं को SIT रिपोर्ट की कॉपी देने पर विचार किया जाएगा।
निष्कर्ष:
राम मंदिर ट्रस्ट में दान की रकम की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता ने श्रद्धालुओं की चिंता को नई आवाज दी है। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई और SIT रिपोर्ट पर टिकी हैं।
नोटिस में शामिल: केंद्र, यूपी सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट।