- केंद्र सरकार ने निर्देश दिया कि वंदे मातरम को आधिकारिक कार्यक्रमों में जन गण मन से पहले प्रस्तुत किया जाए।
- सभी संस्थानों को इन गीतों के सही उच्चारण और पाठ का पालन करने का आदेश।
- वंदे मातरम के सभी छह पद सरकारी आयोजनों में गाने/बजाने की सिफारिश।
- वंदे मातरम के अपमान या बाधा को दंडनीय अपराध बनाने के लिए संसद में विधेयक पेश होने की संभावना।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली ,13 जुलाई :केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने सभी राज्यों और केंद्रीय मंत्रालयों को यह निर्देश जारी किया है कि जब भी किसी आधिकारिक कार्यक्रम में राष्ट्रगीत वंदे मातरम और राष्ट्रगान जन गण मन दोनों का गायन या वादन हो, तो वंदे मातरम को पहले प्रस्तुत किया जाए। गृह मंत्रालय ने 9 जुलाई को राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्रीय मंत्रालयों के सचिवों को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय गीत और राष्ट्रगान के गायन या वादन के दौरान सही लिपि, पाठ और उच्चारण का सख्ती से पालन किया जाए।
पत्र के साथ पूर्व में जारी आदेश भी संलग्न किया गया है, जिसमें उन सभी अवसरों की विस्तृत सूची दी गई है, जब इन दोनों का गान या वादन किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने सभी संबंधित संस्थानों और संगठनों को इस आदेश का सख्ती से पालन करने को कहा है।
इस वर्ष 6 फरवरी को गृह मंत्रालय ने एक और आदेश जारी कर सभी सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम के छहों पद (लगभग 3.10 मिनट) को गाने या बजाने तथा इसे राष्ट्रगान पर वरीयता देने की सलाह दी थी।
वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी और इसे पहली बार उनके उपन्यास आनंदमठ में प्रकाशित किया गया था। जन गण मन की रचना व संगीत रवींद्रनाथ टैगोर ने किया था।
5 मई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्र सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971 में संशोधन को मंजूरी दी है, जिसमें वंदे मातरम के गायन में किसी भी प्रकार की बाधा या अपमान को दंडनीय अपराध माना जाएगा। यह विधेयक 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में पेश होने की संभावना है। फिलहाल, जन गण मन, राष्ट्रीय ध्वज और संविधान का अपमान तीन साल तक की सजा या जुर्माने या दोनों के तहत दंडनीय है।