- मिशन आगमन” नाम से यह ऐतिहासिक मिशन भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हुआ।
- विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण 18 जुलाई 2026 को श्रीहरिकोटा से दोपहर 12:05 बजे हुआ।
- मौसम और नेविगेशन की दिक्कत के कारण लॉन्च में 35 मिनट की देरी हुई।
- लगभग 16 मिनट की उड़ान के बाद पेलोड्स को 450 किमी की ऊंचाई और 60 डिग्री झुकाव पर LEO में स्थापित किया गया।
समग्र समाचार सेवा
हैदराबाद/श्रीहरिकोटा 18 जुलाई – भारत की पहली प्राइवेट स्पेस कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार, 18 जुलाई 2026 को देश के अंतरिक्ष क्षेत्र में इतिहास रच दिया। कंपनी ने अपना पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से दोपहर 12:05 बजे सफलतापूर्वक लॉन्च किया। शुरुआत में लॉन्च सुबह 11:30 बजे होना था, लेकिन मौसम और नेविगेशन में दिक्कत के कारण काउंटडाउन 35 मिनट के लिए रोकना पड़ा।
मिशन आगमन और लॉन्च की मुख्य बातें
इस ऐतिहासिक मिशन का नाम “मिशन आगमन” रखा गया। यह मिशन भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हुआ है। लॉन्च के लगभग 16 मिनट बाद, विक्रम-1 के घरेलू और विदेशी पेलोड्स को 450 किलोमीटर की ऊंचाई और 60 डिग्री के झुकाव पर लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में स्थापित करने की उम्मीद है।
- विक्रम-1 पूरी तरह हल्के और मजबूत कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना है, जो इसे स्टील से पांच गुना हल्का बनाता है। इससे रॉकेट का वजन कम और ईंधन दक्षता अधिक हो गई है।
- इसमें तीन सॉलिड-फ्यूल स्टेज और एक लिक्विड ऑर्बिटल एडजस्टमेंट मॉड्यूल लगा है।
- तीन सॉलिड स्टेज रॉकेट को पृथ्वी से उठाकर कक्षा तक ले जाते हैं।
- लिक्विड मॉड्यूल अंतरिक्ष में पहुंचने पर सैटेलाइट को सटीक कक्षा में स्थापित करता है।
पेलोड्स और कलाकृतियां
मिशन के साथ कई महत्वपूर्ण पेलोड्स भेजे गए, जिनमें ग्रह स्पेस, कॉस्मोसर्व स्पेस, डी-क्यूब्ड और स्काईरूट का इन-हाउस स्कोप पेलोड शामिल हैं। इसके अलावा, 18 कैरेट सोने से बनी “कॉस्मिक ब्लूम” नामक एक माइक्रो-आर्ट पीस भी भेजी गई, जिस पर सर सी.वी. रमन, डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की सूक्ष्म मूर्तियां उकेरी गई हैं।
ऐतिहासिक महत्व
इससे पहले, स्काईरूट ने 2022 में विक्रम-S सबऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च किया था, जो 89.5 किमी की ऊंचाई तक गया था। अब विक्रम-1 ने 450 किमी की पृथ्वी की सर्कुलर निचली कक्षा में पहुंचकर नया कीर्तिमान स्थापित किया, जहां इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन भी मौजूद है।
प्रधानमंत्री का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए स्काईरूट की टीम को बधाई दी। उनका विशेष संदेश भी विक्रम-1 के साथ अंतरिक्ष में भेजा गया।