- अमेरिका की अगुवाई में वामपंथी आतंकवाद और राजनीतिक हिंसा पर 67 देशों की बड़ी मंत्रिस्तरीय बैठक
- भारत की ओर से अमेरिकी राजदूत विनय क्वात्रा शामिल, विदेश मंत्री एस जयशंकर यात्रा पर
- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सभी देशों से वामपंथी आतंक के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया
- रुबियो बोले—वामपंथी आतंकवादी अब अलग-अलग देशों में नेटवर्क बनाकर हमला करते हैं, वैश्विक सहयोग जरूरी
- भारत ने कहा—हम लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद से जूझ रहे, हर रूप के आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति
- कुछ देशों ने वरिष्ठ राजनयिक की जगह जूनियर अधिकारी भेजे, वामपंथी खतरे को लेकर मतभेद
- रुबियो ने जिहादी आतंकवाद के खतरे को कम बताया, भारत ने इसे आज भी गंभीर बताया
- अमेरिका ने कहा—अब दुनिया को वामपंथी हिंसा के खिलाफ एकजुट होना होगा, मतभेद चाहे व्यापार या आव्रजन पर हों
समग्र समाचार सेवा
वाशिंगटन, 19 जुलाई:अमेरिका ने वामपंथी आतंकवाद और राजनीतिक हिंसा से मुकाबले के लिए 67 देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें भारत ने सीमा पार आतंकवाद और अलगाववादी समूहों का मुद्दा मजबूती से उठाया। भारत की ओर से अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय क्वात्रा ने कहा—”भारत हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाता है”।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वामपंथी आतंकवादी अब अलग-अलग देशों में नेटवर्क बनाकर हमला करते हैं, इसलिए वैश्विक सहयोग ज़रूरी है। रुबियो ने यह भी कहा कि जिहादी आतंकवाद का खतरा पहले से कम है, लेकिन भारत ने इसे आज भी उतना ही गंभीर मानते हुए पहलगाम आतंकी हमले का उदाहरण दिया।
बैठक में कुछ देशों ने वामपंथी खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने को लेकर सिर्फ जूनियर अधिकारियों को भेजा। अमेरिका ने साफ कहा—दुनिया को अब वामपंथी हिंसा के खिलाफ एक साथ आना होगा, चाहे अन्य मुद्दों पर मतभेद क्यों न हों।