- पीएम मोदी ने भारत के विभाजन से प्रभावित लोगों के साहस और संघर्ष को याद कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी।
- उन्होंने कहा कि लाखों परिवारों ने संघर्ष के बाद फिर से जीवन बसाया और देश के विकास में योगदान दिया।
- नागरिकों से भाईचारा, सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की अपील की।
- संस्कृत सुभाषित साझा किया—सिर्फ भाग्य नहीं, मेहनत और साहस से मिलती है सफलता।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 14 अगस्त :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिन्होंने भारत के बंटवारे के दौरान असहनीय पीड़ा, विस्थापन और कष्ट झेले। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर संदेश साझा करते हुए विभाजन को इतिहास का सबसे दुखद अध्याय बताया, जिसमें लाखों परिवार उजड़ गए और अनगिनत लोगों की जान गई।
प्रधानमंत्री ने कहा कि विभाजन से प्रभावित लोगों ने अदम्य साहस और जज़्बे के साथ अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया और adversity को opportunity में बदलते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि इन लोगों की जीवन-यात्रा आज भी पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत है।
मोदी ने उम्मीद जताई कि यह अवसर देश में भाईचारा, सौहार्द और एकता की भावना को और प्रबल करेगा तथा सभी नागरिकों को विकसित भारत के संकल्प की ओर एकजुट करेगा। उन्होंने कहा कि कठिन हालात के बावजूद इन लोगों की दृढ़ता व साहस ने दिखा दिया कि हर विपरीत परिस्थिति को संकल्प और मेहनत से पार किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित साझा करते हुए कहा कि—सिर्फ भाग्य पर निर्भर रहना ठीक नहीं, सफलता सदैव मेहनत, साहस और निरंतर प्रयास से ही मिलती है। उन्होंने विज्ञान, कला, तकनीक, कौशल व नवाचार को भी मानव प्रयास का परिणाम बताया और सभी नागरिकों से अपने-अपने लक्ष्यों को पूरी लगन और मेहनत से पाने का आह्वान किया।
पीएम मोदी ने कहा कि विभाजन के समय दी गई कुर्बानियों और संघर्ष की याद हमें आने वाली पीढ़ियों में शांति, अखंडता और राष्ट्रीय एकता की प्रेरणा देती रहनी चाहिए।