- अमित शाह ने कहा, दक्षिणी राज्यों का विकास उच्च साक्षरता, ट्रेंड मैनपावर और समुद्री विशेषज्ञता पर टिका है, पर उनकी प्रगति पानी पर निर्भर है।
- जल विवादों के शीघ्र समाधान के लिए जल शक्ति मंत्रालय, गृह मंत्रालय और अंतरराज्य परिषद की संयुक्त बैठक का सुझाव; राज्यों ने संवाद और सकारात्मक निराकरण पर सहमति जताई।
- महिला और बच्चों के खिलाफ अपराधों की त्वरित जांच, फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत और कुपोषण, स्टंटिंग और ड्रॉपआउट रेश्यो में गिरावट के लिए राज्यों को जिम्मेदारी लेने की अपील।
- ‘नशामुक्त भारत’ अभियान के लिए तीन साल का रोडमैप; शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए राज्यों की भागीदारी जरूरी।
समग्र समाचार सेवा
तमिलनाडु,महाबलीपुरम, 20 अगस्त :तमिलनाडु के महाबलीपुरम में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, पुदुचेरी, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप और तेलंगाना के मुख्यमंत्री, उप-राज्यपाल, वरिष्ठ अधिकारी और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि शामिल हुए।
अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने क्षेत्रीय परिषदों को महज औपचारिकता से सार्थक मंच में बदला है—2014 से 70 बैठकें, जिनमें 80% से अधिक मुद्दों का समाधान निकला। उन्होंने कहा, ब्रह्मपुत्र से कावेरी तक नदियों का जुड़ाव अगले 100 साल तक भारत में पानी की कमी नहीं होने देगा।
उत्तर भारत के जल विवादों का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि वहां 100% मुद्दे हल हो चुके हैं, अब दक्षिण को भी संवाद और सहमति से नई राह बनानी होगी। महिला-बच्चों की सुरक्षा और कुपोषण पर विशेष ध्यान देने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षित व स्वस्थ भारत बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है।
बैठक में आंध्र-तेलंगाना के परिसंपत्ति विवाद के समाधान के लिए गृह मंत्रालय की मध्यस्थता पर सहमति बनी। शाह ने राज्यों को उनके इंटरेस्ट प्रोटेक्ट करने के साथ-साथ संसाधनों का सर्वजन हित में न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित करने की सलाह दी।