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नई दिल्ली, 20 अगस्त :दिल्ली हाईकोर्ट ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) को अपने स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में डिप्राइवेशन प्वाइंट्स के आधार पर प्रवेश सूची फाइनल करने से अंतरिम रूप से रोक दिया है। न्यायमूर्ति जस्मीत सिंह की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि डिप्राइवेशन प्वाइंट्स जोड़ना सीयूईटी (CUET) अंक में बदलाव करने जैसा है, जो प्रवेश प्रक्रिया की पारदर्शिता और समानता को प्रभावित करता है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष दलील दी थी कि डिप्राइवेशन प्वाइंट्स के ज़रिए CUET के वास्तविक स्कोर में फेरबदल छात्रों के लिए असमान स्तर की प्रतियोगिता उत्पन्न करता है। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन तर्कों से सहमति जताई और विश्वविद्यालय प्रशासन को डिप्राइवेशन प्वाइंट्स के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने पर रोक लगाने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने JNU को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई तिथि तय की है। अदालत ने कहा कि जब तक अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक JNU स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में डिप्राइवेशन प्वाइंट्स के आधार पर एडमिशन फाइनल नहीं कर सकता।
यह आदेश उन छात्रों के लिए राहत है, जिन्होंने केवल CUET स्कोर के आधार पर निष्पक्ष प्रवेश की मांग की थी। मामले पर अंतिम निर्णय आने तक JNU की प्रवेश प्रक्रिया पर कोर्ट की निगरानी बनी रहेगी