लोकसभा सचिवालय का 20 बागी TMC सांसदों को नोटिस

दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता याचिकाओं पर सख्त कार्रवाई, सांसदों को सात दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश।

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  • लोकसभा सचिवालय ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।
  • यह नोटिस टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा दाखिल की गई अयोग्यता याचिकाओं के आधार पर एंटी-डिफेक्शन लॉ (दलबदल विरोधी कानून) के तहत दिया गया है।
  • इन बागी सांसदों पर नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल होने या विलय करने का आरोप है।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली: भारतीय संसद और पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। Palpal India की रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली में लोकसभा सचिवालय ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी लोकसभा सांसदों को औपचारिक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस टीएमसी के लोकसभा में नेता और राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी द्वारा जून महीने में दायर की गई उन याचिकाओं पर आधारित है, जिनमें इन सभी बागी सांसदों को संविधान की दसवीं अनुसूची (Anti-Defection Law) के तहत संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी। सचिवालय ने सभी संबंधित सांसदों को नोटिस प्राप्त होने के 7 दिनों के भीतर अपना आधिकारिक स्पष्टीकरण और टिप्पणियां भेजने का निर्देश दिया है।

क्या है पूरा विवाद और बागी सांसदों का मामला?

यह पूरा सियासी घटनाक्रम तब शुरू हुआ जब तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों ने बगावत का बिगुल बजाते हुए खुद को त्रिपुरा आधारित एक अन्य राजनीतिक दल ‘नेशनल सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) के साथ जोड़ने या उसका विलय करने का दावा किया था। इन बागी सांसदों ने संसद के भीतर अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था और मान्यता की मांग भी की थी। इसके विपरीत, टीएमसी नेतृत्व का यह साफ कहना है कि इन सभी सांसदों ने पार्टी के चुनाव चिन्ह पर जीत हासिल की है और पार्टी की अनुमति के बिना किसी अन्य राजनीतिक संगठन या मोर्चे से जुड़ना स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता त्यागने (Voluntarily giving up membership) के बराबर है, जो सीधे तौर पर दलबदल कानून के दायरे में आता है।

सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद तेज हुई प्रशासनिक कार्रवाई

लोकसभा सचिवालय द्वारा यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब हाल ही में देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में इस मामले को लेकर सुनवाई हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई की जिसमें लोकसभा अध्यक्ष (Lok Sabha Speaker) के समक्ष लंबित पड़ी अयोग्यता याचिकाओं पर समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने की मांग की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय की सख्ती और कानूनी प्रक्रिया के आगे बढ़ने के बाद लोकसभा सचिवालय ने नियमों का पालन करते हुए इन सभी 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी कर दिया है। सचिवालय के इस कदम से संसद से लेकर बंगाल की राजनीति तक सरगर्मी काफी बढ़ गई है।

सांसदों के पास जवाब देने के लिए बचा है सीमित समय

नियम 6 और नियम 7(3) (Members of Lok Sabha – Disqualification on Ground of Defection Rules, 1985) के प्रावधानों के अंतर्गत जारी किए गए इस नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि आरोपी सांसदों को अपनी सफाई पेश करने के लिए मात्र 7 दिन का समय दिया जा रहा है। तय समय सीमा के भीतर यदि ये सांसद अपना संतोषजनक जवाब नहीं देते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष के स्तर पर आगे की दंडात्मक और अयोग्यता संबंधी कार्रवाई को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन सांसदों की सदस्यता पर गाज गिरती है, तो संसद के भीतर और आगामी राजनीतिक समीकरणों पर इसका व्यापक असर देखने को मिलेगा।

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