भारत में UPI क्रांति: डिजिटल भुगतान का बदला परिदृश्य
पत्र सूचना कार्यालय (PIB) की फैक्टशीट रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में यूपीआई ने देश के वित्तीय लेनदेन को पूरी तरह से बदल दिया है।
- भारत का डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र पिछले एक दशक में तेजी से विकसित हुआ है, जिसमें UPI (Unified Payments Interface) ने केंद्रीय भूमिका निभाई है।
- पीआईबी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का यूपीआई अब दुनिया के कई देशों में अपनी पहुंच बना चुका है और वर्तमान में यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकार किया जा रहा है।
- वित्तीय वर्ष 2016-17 से लेकर अब तक यूपीआई लेनदेन के वॉल्यूम और वैल्यू में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे देश कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से अग्रसर है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली: भारत ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल तकनीक और वित्तीय समावेश के क्षेत्र में ऐतिहासिक मील के पत्थर हासिल किए हैं। PIB Factsheet की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा विकसित यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) ने भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र (Digital Payment Ecosystem) में एक क्रांतिकारी बदलाव ला दिया है। आज हर छोटे-बड़े लेन-देन से लेकर सरकारी भुगतानों तक, यूपीआई देश के आम नागरिक की दैनिक जीवनशैली का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।
यूपीआई की शुरुआत से लेकर ऐतिहासिक विकास यात्रा
साल 2016 में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कुछ चुनिंदा बैंकों के साथ शुरू हुआ यूपीआई आज दुनिया का सबसे उन्नत और लोकप्रिय रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म बन चुका है। शुरुआत में इसे केवल मोबाइल ऐप्स के माध्यम से जोड़ा गया था, लेकिन समय के साथ इसमें कई नए और आधुनिक फीचर्स जोड़े गए। यूपीआई 2.0 से लेकर ‘इनवॉइस इन द इनबॉक्स’, ऑटोपे (AutoPay), और फीचर फोन यूजर्स के लिए ‘UPI 123PAY’ जैसी सुविधाओं ने देश के दूर-दराज के इलाकों तक डिजिटल भुगतान को बेहद आसान और सुलभ बना दिया है।
लेनदेन के आंकड़ों में अभूतपूर्व और ऐतिहासिक वृद्धि
वित्तीय वर्ष 2016-17 से लेकर हालिया आंकड़ों तक, यूपीआई ने सफलता के नए आयाम गढ़े हैं। शुरुआत में जहाँ सालाना लेनदेन का आंकड़ा कुछ करोड़ तक सीमित था, वहीं अब यह बढ़कर कई सौ अरब तक पहुँच चुका है। इसी प्रकार, कुल लेनदेन के वित्तीय मूल्य (Transaction Value) में भी कई गुना की अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आज देश के कुल डिजिटल भुगतान लेनदेन में अकेले यूपीआई की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत से अधिक है, जो इसकी व्यापक लोकप्रियता और विश्वसनीयता को साबित करती है।
वैश्विक स्तर पर फैल रहा है भारतीय यूपीआई का दायरा
केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारतीय यूपीआई ने अपनी मजबूत पहचान बनाई है। भूटान, नेपाल, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), फ्रांस, श्रीलंका, मॉरीशस और कतर जैसे प्रमुख देशों के बाद अब ग्रीस और मालदीव जैसे अन्य देश भी भारत के इस रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफॉर्म को अपनाने लगे हैं। इससे न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि वैश्विक फिनटेक मानचित्र पर भारत की नेतृत्वकारी स्थिति भी और अधिक मजबूत हो रही है।