भारत और उज्बेकिस्तान के बीच रणनीतिक साझेदारी
ताशकंद में पीएम मोदी और राष्ट्रपति मिर्जोयेव की वार्ता के बाद दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को एक नए मुकाम पर पहुंचाया, कई अहम समझौतों पर मुहर।
- भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत कर लिया है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जोयेव के बीच ताशकंद में ऐतिहासिक द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हुई।
- दोनों देशों ने व्यापार, रक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए।
समग्र समाचार सेवा
ताशकंद, 30 अगस्त: भारत और मध्य एशिया के प्रमुख देश उज्बेकिस्तान के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों में एक नया ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। ग्लोबल गवर्नेंस न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ बनाते हुए इसे ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत कर दिया है। ताशकंद में प्रधानमंत्री मोदी और उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जोयेव (Shavkat Mirziyoyev) के बीच हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक के बाद इस बात की आधिकारिक घोषणा की गई। इस कदम से दोनों मित्र राष्ट्रों के बीच भविष्य के सहयोग के लिए एक मजबूत और स्पष्ट रोडमैप तैयार हुआ है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाइयां
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने आर्थिक साझेदारी और द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। पिछले कुछ वर्षों में भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापारिक आंकड़े लगातार ऊपर आए हैं, लेकिन अभी भी अपार संभावनाएं बाकी हैं। दोनों पक्षों ने फार्मास्यूटिकल्स, कृषि प्रौद्योगिकी, वस्त्र उद्योग (टेक्सटाइल), आईटी और नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में संयुक्त उद्यमों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया। इसके साथ ही, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) और चाबहार बंदरगाह के इष्टतम उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा की गई, ताकि दोनों देशों के बीच माल की आवाजाही सुगम हो सके।
रक्षा, सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ साझा मोर्चा
आज के दौर में वैश्विक सुरक्षा के लिए आतंकवाद और कट्टरपंथ सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। भारत और उज्बेकिस्तान ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों की कड़ी निंदा करते हुए सुरक्षा सहयोग को और गहरा करने का निर्णय लिया है। दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘Dustlik’ के दायरे को और व्यापक बनाया जाएगा। इसके अलावा, साइबर सुरक्षा, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और खुफिया जानकारी साझा करने (Intelligence Sharing) के तंत्र को और अधिक मजबूत करने के लिए रक्षा मामलों पर आपसी संवाद को नियमित करने पर सहमति बनी है।
सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान
भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध सदियों पुराने हैं। मध्यकालीन इतिहास से लेकर कला, संगीत, और खान-पान तक दोनों संस्कृतियों में गहरी समानताएं देखने को मिलती हैं। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान लोगों से लोगों के संपर्क (People-to-People Ties) को बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक आदान-प्रदान, योग और आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार तथा पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। ताशकंद और समरकंद में भारतीय संस्कृति के प्रति स्थानीय नागरिकों का लगाव दोनों देशों के बीच की दूरी को पाटने का काम करता है।
क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक मंचों पर सहयोग
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करते हुए दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि मध्य एशिया और दक्षिण एशिया की शांति व स्थिरता परस्पर जुड़ी हुई है। अफगानिस्तान की मौजूदा स्थिति और मानवीय सहायता को लेकर भी दोनों राष्ट्रों ने अपने साझा दृष्टिकोण को साझा किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के नेतृत्व को धन्यवाद देते हुए कहा कि वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को बुलंद करने में उज्बेकिस्तान का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है। यह रणनीतिक साझेदारी आने वाले दशकों में दोनों देशों के विकास और क्षेत्र में शांति की गारंटी बनेगी।