पीएम मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान
ताशकंद में राष्ट्रपति शवकत मिर्जोयेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सबसे बड़े राजकीय पुरस्कार 'ऑर्डर ऑफ ओली दाराजाली दोस्तलिक' से सम्मानित किया।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ओली दाराजाली दोस्तलिक’ से सम्मानित किया गया।
- यह सम्मान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करने के लिए दिया गया है।
- पीएम मोदी ने इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को 1.4 अरब भारतीयों और दोनों देशों की सदियों पुरानी दोस्ती को समर्पित किया।
समग्र समाचार सेवा
ताशकंद, 30 अगस्त: भारतीय कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। ग्लोबल गवर्नेंस न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी दो दिवसीय उज्बेकिस्तान यात्रा के दौरान वहाँ के सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ ओली दाराजाली दोस्तलिक’ (Oliy Darajali Do’stlik Order) से नवाजा गया। ताशकंद में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जोयेव (Shavkat Mirziyoyev) ने स्वयं प्रधानमंत्री मोदी को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास, रणनीतिक साझेदारी और गहरे सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊंचाइयां प्रदान करने के लिए दिया गया है।
‘दोस्तलिक’ शब्द का महत्व और भारत के साथ जुड़ाव
इस गरिमामयी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान की सरकार और वहाँ के नागरिकों के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने अपने संबोधन में ‘दोस्तलिक’ (Dostlik) शब्द का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के आम जनमानस में इस शब्द से गहरी आत्मीयता जुड़ी हुई है। ‘दोस्तलिक’ का अर्थ मित्रता होता है और भारत के हर परिवार में इस शब्द का उपयोग अपनेपन की भावना को दर्शाने के लिए किया जाता है। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह पुरस्कार केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं है, बल्कि यह भारत के 1.4 अरब लोगों की भावनाओं और दोनों देशों की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की सच्ची मान्यता है।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मिली नई दिशा
इस महत्वपूर्ण यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शवकत मिर्जोयेव के बीच द्विपक्षीय वार्ताओं का दौर चला, जिसमें दोनों नेताओं ने आपसी संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने पर सहमति जताई। चर्चा के बाद भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया। दोनों राष्ट्रों ने व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी, और फार्मास्यूटिकल्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देने की रूपरेखा तैयार की है।
वैश्विक दक्षिण (Global South) की मजबूत आवाज
आज के इस बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में भारत और उज्बेकिस्तान की यह साझेदारी क्षेत्रीय स्थिरता और विकास के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश वैश्विक दक्षिण के हितों और पूरी मानवता के कल्याण के लिए पूरी निष्ठा के साथ एक संयुक्त आवाज बनकर काम करेंगे। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यूरेशियाई क्षेत्र और मध्य एशिया के साथ भारत के रिश्ते हमेशा से सौहार्दपूर्ण रहे हैं, और यह नया सम्मान इन रिश्तों को भविष्य की चुनौतियों के लिए और अधिक मजबूत बनाएगा। उज्बेकिस्तान के बाद प्रधानमंत्री मोदी शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए किर्गिस्तान के लिए रवाना होंगे।