समग्र समाचार सेवा
ताशकंद, 30 अगस्त : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मध्य एशिया दौरे के दौरान भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों को नई गति देने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की द्विपक्षीय यात्रा पर हैं, जिसके बाद वह किर्गिज गणराज्य में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
ताशकंद पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान में आयोजित योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया। योग कार्यक्रम में उनकी भागीदारी को दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संपर्क और भारत की सॉफ्ट पावर के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। ताशकिस्तान में प्रधानमंत्री के स्वागत के दौरान भारतीय तिरंगे के रंगों में प्रमुख इमारतों को रोशन किया गया।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और सांस्कृतिक सहयोग प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं। मध्य एशिया भारत की विदेश नीति में लगातार महत्वपूर्ण भूमिका हासिल कर रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री का यह दौरा क्षेत्र के साथ भारत के रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री के दौरे का दूसरा महत्वपूर्ण चरण किर्गिज गणराज्य में SCO शिखर सम्मेलन है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिज गणराज्य की यात्रा करेंगे। SCO मंच पर क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे चर्चा में रह सकते हैं।
उज्बेकिस्तान में भारतीय समुदाय ने भी प्रधानमंत्री का स्वागत किया। योग कार्यक्रम और प्रवासी भारतीयों की भागीदारी ने दौरे के सांस्कृतिक पक्ष को मजबूत किया है।
भारत के लिए मध्य एशिया रणनीतिक रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह क्षेत्र ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से अहम है। साथ ही, भारत इस क्षेत्र के देशों के साथ कनेक्टिविटी और आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।