आरएसएस के शताब्दी वर्ष पर लंदन पहुंचे डॉ. मोहन भागवत
सेवा, सामाजिक समरसता और साझा मूल्यों पर केंद्रित सभ्यतागत संवाद के शताब्दी कार्यक्रमों की कड़ी में सरसंघचालक का यूके प्रवास शुरू।
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर वैश्विक स्तर पर सभ्यतागत संवाद और सेवा के शताब्दी कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
- इसी श्रृंखला के तहत सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 2 से 7 सितंबर 2026 तक लंदन के आधिकारिक प्रवास पर हैं, जहाँ वे विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं।
- इस दौरान न्यूयॉर्क, टोरंटो और अब लंदन में सर्वपंथीय धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों और प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के संदेश पर व्यापक चर्चा की गई।
समग्र समाचार सेवा
लंदन, 7 सितंबर: वर्ष 1925 में भारतीय सभ्यता और सांस्कृतिक मूल्यों के मजबूत आधार पर स्थापित एक वैचारिक आंदोलन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) इस वर्ष अपनी स्थापना का गौरवशाली शताब्दी वर्ष मना रहा है। इस ऐतिहासिक उपलक्ष्य में संघ द्वारा दुनिया भर में विश्व समुदाय के साथ सभ्यतागत संपर्क और संवाद कार्यक्रमों की एक विस्तृत श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इसी वैश्विक श्रृंखला की परिणति संगठन के मार्गदर्शक एवं सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के 2 से 7 सितंबर 2026 तक के लंदन प्रवास के रूप में हो रही है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य विश्व पटल पर भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांतों, निस्वार्थ सेवा भाव और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा को साझा करना है, जिससे वैश्विक स्तर पर शांति और भाईचारे को बढ़ावा मिल सके।
सेवा की एक शताब्दी और राष्ट्र निर्माण के कार्य
आरएसएस की स्थापना भारत के स्वाधीनता संग्राम के दौरान डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने की थी, जिनका दृढ़ विश्वास था कि देश की राजनीतिक और आर्थिक स्वतंत्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए एक सुसंगठित और जागरूक समाज का होना अत्यंत आवश्यक है। पिछले सौ वर्षों में यह संगठन एक ऐसे व्यापक सभ्यतागत आंदोलन के रूप में विकसित हुआ है, जो देश भर में समाज सेवा के कार्यों में जुटे स्वयंसेवकों के माध्यम से संचालित होता है। आरएसएस के वार्षिक प्रतिवेदन के अनुसार, वर्तमान में भारत भर में 1,52,000 से अधिक सेवा कार्य संचालित हो रहे हैं, जिनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और स्वावलंबन के क्षेत्र प्रमुख हैं। शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन ने समाज के व्यापक हित में पांच प्रमुख प्राथमिकताएं निर्धारित की हैं—सामाजिक समरसता, पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करना, पर्यावरण संरक्षण, स्वावलंबन और नागरिक कर्तव्य।
वैश्विक स्तर पर सभ्यतागत संवाद की श्रृंखला
अपने शताब्दी वर्ष के तहत आरएसएस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न समुदायों के साथ संवाद का अनूठा सिलसिला शुरू किया है। इस वैश्विक संपर्क अभियान की शुरुआत अप्रैल 2026 में सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी के यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका और जर्मनी के दौरों से हुई थी। इसके पश्चात, न्यूयॉर्क में आयोजित ‘Universal Oneness’ सम्मेलन और टोरंटो के ‘Hindu Vishwa Bandhu’ सम्मेलन में हजारों प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अब इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए डॉ. मोहन भागवत लंदन में विभिन्न धर्मगुरुओं, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ संवाद कर रहे हैं। लंदन में इस संपूर्ण कार्यक्रम का समन्वय ‘इंटीग्रल’ नामक संस्था द्वारा किया जा रहा है, जिसे ब्रिटेन के 115 से अधिक सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों का सक्रिय सहयोग प्राप्त है।
सामुदायिक नेतृत्व और सहभागिता का भव्य आयोजन
लंदन प्रवास के दौरान डॉ. भागवत विल्सडेन स्थित श्री स्वामीनारायण मंदिर और खालसा जत्था ब्रिटिश आइल्स गुरुद्वारे जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों का दौरा कर चुके हैं, तथा जैन मंदिर जाने का भी कार्यक्रम है। आगामी 6 सितंबर 2026 को “Celebration of Oneness” विषय के अंतर्गत एक भव्य सामुदायिक नेतृत्वकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसकी पहल हिंदू स्वयंसेवक संघ (HSS UK) द्वारा की गई है। इस कार्यक्रम में ब्रिटेन भर के 310 से अधिक सामुदायिक संगठनों और संघों के प्रतिनिधियों के भाग लेने की संभावना है। यह यात्रा न केवल प्रवासी भारतीयों को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम कर रही है, बल्कि दुनिया भर में भारतीय संस्कृति के समावेशी और शांतिपूर्ण स्वरूप को भी मजबूती से प्रस्तुत कर रही है।