राम वन गमन मार्ग उद्घाटन से पहले ही धंसा
उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट में भारी भ्रष्टाचार और लापरवाही उजागर, पहली ही बारिश में पुल का हिस्सा टूटा।
- उत्तर प्रदेश में 4300 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला राम वन गमन मार्ग उद्घाटन से पहले ही पहली बारिश में धंस गया है।
- इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट के तहत गंगा नदी पर बनने वाले 6 लेन पुल का ठेका भाजपा सांसद नवीन जैन के भाइयों की कंपनी PNC Infratech को मिला था।
- घटिया निर्माण कार्य और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते विपक्षी दलों और मीडिया द्वारा निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली / प्रयागराज, 8 सितंबर: उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे और सड़क निर्माण परियोजनाओं की गुणवत्ता एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। हजारों करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे महत्वकांक्षी ‘राम वन गमन मार्ग’ का एक हिस्सा और पुल उद्घाटन से पहले ही पहली बारिश की मार नहीं झेल पाया और धंस गया। प्रयागराज से लगभग 35 से 40 किलोमीटर दूर श्रृंगवेरपुर को जोड़ने वाले इस बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट में आई इस बड़ी खामी से प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। स्थानीय नागरिकों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना निर्माण कार्यों में हो रही भारी अनदेखी और भ्रष्टाचार की पोल खोलती है, जिससे सरकार की छवि को भी धक्का लगा है।
भाजपा सांसद नवीन जैन के भाइयों की कंपनी पर नजरें
इस पूरी परियोजना में निर्माण कार्य करने वाली कंपनी को लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी सरगर्मी तेज हो गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस हजारों करोड़ रुपये की हाई-प्रोफाइल परियोजना के तहत गंगा नदी पर छह लेन के पुल और सड़क निर्माण का ठेका ‘PNC Infratech’ कंपनी को मिला था। इस कंपनी का संबंध भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद और प्रमुख कारोबारी नवीन जैन के परिवार से बताया जाता है। कंपनी के शीर्ष पदों पर उनके भाई प्रदीप कुमार जैन, चक्रेश कुमार जैन और योगेश जैन जैसे प्रमोटर व निदेशक शामिल हैं। विपक्षी दलों और विश्लेषकों का कहना है कि सत्ता के करीब होने के कारण इस तरह की बड़ी कंपनियों पर सख्त प्रशासनिक कार्रवाई से बचा जाता है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है।
हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट और घटिया निर्माण के आरोप
केंद्र सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, अयोध्या से चित्रकूट तक प्रस्तावित राम वन गमन मार्ग की कुल लंबाई करीब 210 किलोमीटर है, जो कई महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को आपस में जोड़ता है। इतने बड़े बजट और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट के बावजूद निर्माण कार्य में इस स्तर की लापरवाही मिलना यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर गुणवत्ता की निगरानी करने वाले अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहे हैं। इससे पहले भी इस समूह से जुड़ी कंपनियों के अन्य प्रोजेक्ट्स जैसे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में भी कम समय में दरारें आने और धंसने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद एनएचएआई (NHAI) और अन्य एजेंसियों द्वारा कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
गुणवत्ता नियंत्रण और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
इस तरह की घटनाएं देश के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं। जनता के गाढ़े पसीने की कमाई से बनने वाले इन प्रोजेक्ट्स का इस तरह उद्घाटन से पहले ही ध्वस्त हो जाना न केवल वित्तीय भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भविष्य में यात्रा करने वाले लाखों श्रद्धालुओं और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा है। जनता और विपक्षी नेताओं की मांग है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और निर्माण में लापरवाही बरतने वाली कंपनी तथा दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके।