पटना में जीएनएम नर्स की तस्करी का प्रयास
सरकारी मेगा जॉब फेयर के फर्जी नियुक्ति पत्र का झांसा देकर युवती को होटल में बंधक बनाने की कोशिश, पुलिस ने मुख्य आरोपी को दबोचा।
- पटना के मेगा जॉब फेयर में नौकरी का फर्जी नियुक्ति पत्र देकर जीएनएम नर्स के अपहरण और मानव तस्करी का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
- शातिर ठगों ने स्वास्थ्य विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवती को होटल में बुलाया था, जहां उसकी सूझबूझ से उसकी जान बच गई।
- पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और पूरे मानव तस्करी नेटवर्क की जांच शुरू कर दी है।
समग्र समाचार सेवा
पटना (बिहार), 10 सितंबर: बिहार की राजधानी पटना से एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ सरकारी मेगा रोजगार मेले के नाम पर एक जीएनएम (GNM) प्रशिक्षित नर्स को मानव तस्करी के जाल में फंसाने का प्रयास किया गया। इस घटना ने एक बार फिर नौकरी के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े और युवतियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शातिर अपराधियों ने सरकारी नौकरी का झांसा देकर युवती को एक होटल में बुलाया था, जहाँ उसे बंधक बनाकर तस्करी की साजिश रची जा रही थी। हालांकि, पीड़ित युवती की बहादुरी और सूझबूझ के चलते एक बड़ा हादसा टल गया और समय रहते पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को धर दबोचा।
फर्जी जॉब लेटर और इंटरव्यू के नाम पर जालसाजी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़ित युवती ने नर्सिंग का कोर्स पूरा करने के बाद रोजगार की तलाश में थी। इसी दौरान शातिर ठगों ने उसे संपर्क किया और दावा किया कि सरकार द्वारा आयोजित मेगा जॉब फेयर के माध्यम से उसका चयन स्वास्थ्य विभाग में जीएनएम नर्स के पद पर हो गया है। जालसाजों ने उसे एक आकर्षक और पूरी तरह से असली दिखने वाला फर्जी नियुक्ति पत्र (Appointment Letter) भी थमा दिया। कागजी औपचारिकताओं और मेडिकल जांच के नाम पर उसे पटना के एक स्थानीय होटल में बुलाया गया था। जब युवती तय समय पर वहां पहुंची, तो आरोपियों के हाव-भाव और हरकतों से उसे संदेह हुआ कि दाल में कुछ काला है।
होटल के कमरे में बंधक बनाने की थी साजिश
होटल के कमरे में पहुंचने के बाद आरोपियों ने युवती पर दबाव बनाना शुरू कर दिया और उसके मोबाइल फोन तथा कागजात अपने कब्जे में लेने की कोशिश की। जब युवती ने इसका विरोध किया तो उसे बंधक बनाने और जान से मारने की धमकी दी गई। आरोपियों की मंशा साफ थी कि वे उसे किसी अवैध रैकेट या मानव तस्करी गिरोह के हवाले करने की फिराक में थे। किसी तरह अपनी जान बचाकर और वहां से मौका पाकर युवती बाहर आई तथा तुरंत स्थानीय पुलिस थाने पहुंचकर अपनी आपबीती सुनाई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक विशेष टीम गठित की और बताए गए पते पर छापेमारी कर मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
इस बड़ी घटना के सामने आने के बाद पटना पुलिस और प्रशासन के होश उड़ गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं और क्या इसके तार किसी बड़े मानव तस्करी सिंडिकेट से जुड़े हुए हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि ये ठग बेरोजगार युवाओं और युवतियों को निशाना बनाने के लिए सरकारी योजनाओं और मेलों के नामों का दुरुपयोग करते हैं। प्रशासन ने युवाओं से अपील की है कि वे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या संदिग्ध जॉब ऑफर के झांसे में न आएं और नौकरी की पुष्टि आधिकारिक पोर्टलों से ही करें। गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के आधार पर पुलिस इस नेटवर्क के अन्य गुर्गों की तलाश कर रही है।