Malaysian PM Anwar Ibrahim: ब्रिक्स डिनर में गाया किशोर कुमार का गाना
मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान किशोर कुमार का मशहूर गाना गाकर सबका दिल जीत लिया।
- मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान एक अनूठा सांस्कृतिक अंदाज दिखाया।
- उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित रात्रिभोज के इतर किशोर कुमार के लोकप्रिय क्लासिक गीत “ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत” को अपनी आवाज दी।
- सोशल मीडिया पर उनके इस गाने का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लोगों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है।
- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम ने बिखेरा बॉलीवुड संगीत का जादू
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 13 सितंबर: नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान कूटनीति और भू-राजनीति के गंभीर माहौल के बीच एक बेहद खूबसूरत और खुशनुमा पल देखने को मिला। भारत की यात्रा पर आए मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम (Anwar Ibrahim) ने अपनी सादगी और संगीत प्रेम से सभी का दिल जीत लिया। शिखर सम्मेलन के आधिकारिक कार्यक्रमों और बैठकों से हटकर, अनवर इब्राहिम ने एक अनूठा सांस्कृतिक अंदाज दिखाया, जब उन्होंने महान गायक किशोर कुमार के एक सदाबहार गीत को गुनगुनाया। उनके इस सहज और आत्मीय स्वभाव ने सोशल मीडिया पर भी खासी सुर्खियां बटोरी हैं।
‘ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत’ गाकर किया मंत्रमुग्ध
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारत मंडपम में ब्रिक्स नेताओं और विशिष्ट अतिथियों के सम्मान में आयोजित एक विशेष रात्रिभोज (Gala Dinner) के दौरान यह यादगार पल सामने आया। पियानो की सुरीली धुनों के बीच मलेशियाई प्रधानमंत्री ने वर्ष 1965 की प्रतिष्ठित फिल्म ‘तीन देवियां’ के मशहूर गीत “ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत” को बड़े ही खूबसूरत अंदाज में गाया। संगीत के प्रति उनके इस प्रेम और सहज प्रस्तुति ने वहां मौजूद सभी गणमान्य अतिथियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
अनवर इब्राहिम ने इस दिल को छू लेने वाले पल का वीडियो खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी साझा किया। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कैप्शन लिखा, “गुरु, क्या मुझे थोड़ी देर गाने की अनुमति मिल सकती है, ठीक है?” उनके इस वीडियो के सामने आते ही इंटरनेट पर यह तेजी से वायरल हो गया। भारत और दुनिया भर के सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो पर अपनी सकारात्मक प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कई लोगों ने इसे दो देशों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव और आपसी भाईचारे की एक बेहतरीन मिसाल बताया है।
भारतीय सिनेमा और संस्कृति के प्रति पुराना लगाव
यह पहली बार नहीं है जब मलेशियाई प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक मंचों पर भारतीय संगीत और सिनेमा के प्रति अपने प्रेम को खुलकर जाहिर किया हो। अनवर इब्राहिम को हिंदी गानों और भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव है। इससे पहले भी उनकी भारत यात्राओं के दौरान ऐसे कई अनूठे प्रसंग देखने को मिले हैं जब उन्होंने बॉलीवुड के क्लासिक गानों के प्रति अपनी पसंद को साझा किया है। भारत के समृद्ध इतिहास, कला और सिनेमा के प्रति उनका यह सम्मान दोनों देशों के नागरिकों के बीच भावनात्मक और सांस्कृतिक सेतु का काम करता है।
कठिन वैश्विक चुनौतियों और कूटनीतिक वार्ताओं से भरे इस उच्च-स्तरीय शिखर सम्मेलन के बीच अनवर इब्राहिम की इस संगीत-प्रेमी शैली ने यह साबित कर दिया कि कला और संगीत की कोई सीमा नहीं होती है। यह पल कूटनीति के औपचारिक दायरे से परे जाकर मानवीय संवेदनाओं और आपसी जुड़ाव को मजबूत करने का एक बेहतरीन उदाहरण बन गया।
भारत और मलेशिया के द्विपक्षीय संबंधों में नई मजबूती
सांस्कृतिक आदान-प्रदान के इन खुशनुमा पलों के अलावा, इस यात्रा के दौरान भारत और मलेशिया के रणनीतिक संबंधों में भी एक नया अध्याय जुड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के बीच हुई द्विपक्षीय बैठकों में दोनों देशों के रिश्तों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर पर और अधिक मजबूत करने पर सहमति बनी। डिजिटल तकनीक, ऊर्जा, रक्षा, व्यापार, निवेश और पर्यटन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण समझौतों पर मुहर लगी है।
दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और मलेशिया के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध सदियों पुराने हैं और आने वाले समय में ये संबंध आपसी सहयोग के नए आयाम तय करेंगे। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मलेशिया की भागीदारी और प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम का यह सांस्कृतिक जुड़ाव दोनों मित्र राष्ट्रों के बीच की आत्मीयता को और अधिक प्रगाढ़ करता है।
निष्कर्ष
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम द्वारा किशोर कुमार का यह प्रसिद्ध गीत गाना इस बात का प्रमाण है कि वैश्विक मंचों पर गंभीर राजनीतिक संवादों के साथ-साथ सांस्कृतिक और मानवीय पहलू भी कूटनीति को एक नया और सकारात्मक आयाम दे सकते हैं। यह घटना लंबे समय तक लोगों के जेहन में एक मधुर और सुखद याद के रूप में दर्ज रहेगी।