PM Modi and Tokayev: भारत-कजाकिस्तान रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्त तोकायेव ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर द्विपक्षीय संबंधों और ऊर्जा सहयोग पर की अहम चर्चा।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्त तोकायेव के साथ द्विपक्षीय बैठक की।
- दोनों नेताओं ने राजनीतिक संबंधों, व्यापार, रक्षा, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र में आपसी सहयोग की प्रगति की समीक्षा की।
- बैठक के दौरान क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज), उभरती प्रौद्योगिकियों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया।
- ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और कजाकिस्तान के बीच उच्च स्तरीय रणनीतिक चर्चा
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 13 सितंबर: नई दिल्ली में आयोजित ऐतिहासिक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान कूटनीतिक गतिविधियों का सिलसिला लगातार जारी रहा। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कजाकिस्तान गणराज्य के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्त ताकायेव (Kassym-Jomart Tokayev) के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच हुई इस उच्च स्तरीय मुलाकात का मुख्य उद्देश्य भारत और कजाकिस्तान के बीच बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करना तथा आपसी हितों के विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति की समीक्षा करना था।
प्राचीन सभ्यतागत संबंधों और मजबूत होती कड़ियों का स्मरण
बैठक की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और कजाकिस्तान के बीच मौजूद प्राचीन सभ्यतागत संबंधों और ऐतिहासिक सांस्कृतिक कड़ियों को याद किया। प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच लगातार और स्थिर रूप से विकसित हो रहे द्विपक्षीय संबंधों पर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। कजाकिस्तान मध्य एशिया का सबसे बड़ा देश और अर्थव्यवस्था है, जो भारत के लिए इस क्षेत्र में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और रणनीतिक साझेदार रहा है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के बीच शांति, स्थिरता और विकास को बढ़ावा देने में यह साझेदारी बेहद अहम भूमिका निभाती है।
ऊर्जा सुरक्षा और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) पर विशेष फोकस
आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी संसाधन सबसे बड़े प्राथमिकता वाले क्षेत्र बन चुके हैं। इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति तोकायेव ने ऊर्जा (Energy) और क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) के क्षेत्र में सहयोग को और प्रगाढ़ करने पर विस्तार से चर्चा की। भारत अपनी बढ़ती औद्योगिक और तकनीकी आवश्यकताओं के लिए स्वच्छ ऊर्जा और दुर्लभ खनिजों के स्थायी स्रोतों की तलाश कर रहा है, और कजाकिस्तान इस दिशा में एक प्रमुख साझीदार के रूप में उभर रहा है। इसके अलावा, पारंपरिक व्यापार, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, और आतंकवाद विरोधी उपायों पर भी दोनों पक्षों के बीच सार्थक संवाद हुआ।
कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग के नए रास्ते
व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उपायों पर भी दोनों नेताओं ने विचार-विमर्श किया। इंटरनेशनल नॉर्थ-SOUTH ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) और कजाकिस्तान के लॉजिस्टिक्स हब के माध्यम से व्यापारिक बाधाओं को दूर करने तथा आपसी निवेश को बढ़ाने के तरीकों पर बात की गई। दोनों देशों के बीच फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, अंतरिक्ष अनुसंधान, डिजिटल तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें धरातल पर उतारने के लिए ठोस कदम उठाने पर सहमति बनी।
क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान
द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ दोनों नेताओं ने वर्तमान क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी अपने दृष्टिकोण साझा किए। कजाकिस्तान के राष्ट्रपति तोकायेव ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship 2026) के दौरान उठाए गए कदमों और वैश्विक दक्षिण (Global South) के हितों को मुखरता से उठाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि वैश्विक मंचों पर भारत की नेतृत्वकारी भूमिका अंतरराष्ट्रीय शांति और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति कासिम-जोमार्त तोकायेव के बीच ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर हुई यह मुलाकात दोनों देशों के बीच अटूट आपसी विश्वास और साझा विजन का प्रतीक है। यह बैठक न केवल कजाकिस्तान और भारत के पारंपरिक संबंधों को नई गति प्रदान करती है, बल्कि यह भविष्य में आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता के नए द्वार भी खोलती है।