बच्चों के स्मार्टफोन इस्तेमाल पर राष्ट्रीय नीति की उठी मांग
सी-लैब (C-Lab) संगठन ने डिजिटल स्क्रीन टाइम के दुष्प्रभावों से बच्चों को बचाने के लिए कड़े नियम और उम्र सीमा तय करने पर दिया जोर।
- ‘सी-लैब’ (C-Lab) ने बच्चों द्वारा स्मार्टफोन और डिजिटल मीडिया के अत्यधिक उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक राष्ट्रीय नीति बनाने की जोरदार मांग की है।
- डिजिटल स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और शारीरिक विकास पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों को लेकर गहरी चिंता जताई गई है।
- इस प्रस्तावित नीति के तहत बच्चों की उम्र के अनुसार सोशल मीडिया के इस्तेमाल और गेमिंग ऐप्स पर कड़े नियम व आयु-सीमा तय करने पर जोर दिया गया है।
समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 26 सितंबर: आज के डिजिटल युग में जहां एक तरफ तकनीक ने शिक्षा और विकास के नए द्वार खोले हैं, वहीं दूसरी तरफ बच्चों के बीच स्मार्टफोन और सोशल मीडिया की लत एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। इसी बड़ती समस्या पर गंभीर रुख अपनाते हुए ‘सी-लैब’ (C-Lab) ने बच्चों द्वारा स्मार्टफोन और डिजिटल मीडिया के उपयोग को विनियमित (Regulate) करने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय नीति (National Policy) बनाए जाने की जोरदार मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते बच्चों के स्क्रीन टाइम और ऑनलाइन गतिविधियों पर वैधानिक नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो आने वाली पीढ़ी के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर इसके बेहद दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
हाल के विभिन्न अध्ययनों से यह बात सामने आई है कि बहुत कम उम्र में बच्चों के हाथों में स्मार्टफोन थमाने से उनकी नींद के पैटर्न में गड़बड़ी, आंखों की रोशनी कमजोर होना, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। सी-लैब के विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ऑनलाइन गेमिंग ऐप्स के एल्गोरिदम इस तरह से डिजाइन किए गए हैं कि बच्चे आसानी से उनकी लत का शिकार हो जाते हैं। इसके कारण वे बाहरी खेलों, सामाजिक गतिविधियों और वास्तविक संवाद से दूर होते जा रहे हैं, जिससे उनके समग्र व्यक्तित्व विकास में बाधा आ रही है।
प्रस्तावित नीति के मुख्य बिंदु और दिशा-निर्देश
सी-लैब द्वारा उठाई गई इस मांग में कुछ प्रमुख सुझाव और नियम शामिल किए गए हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों को डिजिटल दुनिया के खतरों से सुरक्षित रखना है:
आयु-सीमा और सत्यापन: सोशल मीडिया और एडिक्टिव गेमिंग ऐप्स के इस्तेमाल के लिए कड़ा आयु-सत्यापन (Age Verification) सिस्टम अनिवार्य किया जाए।
स्कूलों में प्रतिबंध: बच्चों के मानसिक संतुलन को बनाए रखने के लिए शैक्षणिक परिसरों और स्कूलों के भीतर स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर सख्त रोक लगाई जाए।
माता-पिता के लिए मार्गदर्शन: डिजिटल साक्षरता अभियानों के जरिए अभिभावकों को यह प्रशिक्षित किया जाए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम को कैसे सीमित कर सकते हैं।
जानकारों का मानना है कि सरकार और शिक्षाविदों को मिलकर जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि तकनीक का उपयोग बच्चों के विकास में सहायक बने, न कि उनके विनाश का कारण।