प्रशांत भूषण पर केस दर्ज, रूसी विदेश मंत्री का फेक वीडियो

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करने के आरोप में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दर्ज की प्राथमिकी।

  • वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की।
  • रूसी विदेश मंत्री लावरोव का फर्जी AI वीडियो शेयर करने का आरोप।
  • विदेश मंत्रालय और रूसी दूतावास ने वीडियो को पूरी तरह से बताया फर्जी।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 04 नवंबर: देश के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (Sergey Lavrov) का एक कथित फर्जी और एडिटेड (Doctored/AI-generated) वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करने के आरोप में प्रशांत भूषण के खिलाफ आपराधिक मामला (FIR) दर्ज कर लिया है। आरोप है कि इस वीडियो के माध्यम से भारत की विदेश नीति, तेल खरीद और आंतरिक मामलों को लेकर भ्रामक व मनगढ़ंत तथ्य फैलाए गए थे।

यह मामला तब सामने आया जब विदेश मंत्रालय (MEA) की फैक्ट-चेक यूनिट और भारत स्थित रूसी दूतावास ने आधिकारिक बयान जारी कर उक्त वीडियो को पूरी तरह से मनगढ़ंत और फर्जी करार दिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस की साइबर पेट्रोलिंग टीम ने इस पर त्वरित संज्ञान लिया।

साइबर गश्त के दौरान खुला मामला और एफआईआर की धाराएं

दिल्ली पुलिस द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, 3 नवंबर को साइबर पेट्रोलिंग के दौरान यह देखा गया कि वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से रूसी विदेश मंत्री का एक एडिटेड वीडियो साझा किया गया था। इस वीडियो में रूसी विदेश मंत्री को कथित तौर पर भारत के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करते हुए दिखाया गया था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल सेल पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 263/26 दर्ज की गई है। इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं—धारा 336(4) (जालसाजी), धारा 353(1)(c) (सार्वजनिक रूप से शांति भंग करने के इरादे से बयान देना), धारा 356 (मानहानि) और धारा 340(2) (फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना)—तथा सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66C (आइडेंटिटी थेफ्ट) के तहत प्रकरण पंजीकृत किया गया है।

विदेश मंत्रालय और रूसी दूतावास का कड़ा रुख

इस विवादित वीडियो के वायरल होने के तुरंत बाद भारत के विदेश मंत्रालय की फैक्ट-चेकिंग शाखा ने स्पष्ट किया कि रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के वीडियो के साथ तकनीकी रूप से छेड़छाड़ की गई है और इसमें जोड़ा गया ऑडियो तथा सबटाइटल पूरी तरह से फर्जी हैं।

वहीं, भारत में रूसी दूतावास ने भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक के जरिए इस तरह की भ्रामक सामग्री फैलाए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया और सोशल मीडिया यूजर्स से इस प्रकार की गलत जानकारियों को साझा न करने की अपील की। विवाद बढ़ने और पुलिस कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद प्रशांत भूषण ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से उस पोस्ट को हटा (Delete) दिया है।

निष्कर्ष

सोशल मीडिया पर एआई और डीपफेक तकनीक से निर्मित फर्जी वीडियो फैलाना न केवल घरेलू सुरक्षा और शांति के लिए खतरा बन रहा है, बल्कि इससे अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है। दिल्ली पुलिस द्वारा प्रशांत भूषण के खिलाफ की गई यह कड़ी कानूनी कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बिना जांचे-परखे फर्जी खबरें और मॉर्फ्ड कंटेंट साझा करने पर कानून किसी को भी बख्शने वाला नहीं है।

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