राहुल की बैठक से आज फिर गायब शशि थरूर

तीन हफ्तों में तीन अहम बैठकों से अनुपस्थित, मगर अन्य कार्यक्रमों में सक्रिय दिखे शशि थरूर; पार्टी में असहजता बढ़ी

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  • राहुल गांधी की आज की बैठक से भी शशि थरूर नदारद रहे
  • हाल में तीन बैठकों से अनुपस्थित रहे, सभी बार पूर्व सूचना दी
  • पार्टी में थरूर के रुख और सोशल मीडिया पोस्ट पर बढ़ी चर्चा
  • केरल राजनीति और चुनावों के चलते कांग्रेस कार्रवाई से बच रही है

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 12 दिसंबर: राहुल गांधी ने आज पार्लियामेंट एनेक्सी में कांग्रेस सांसदों की बैठक बुलाई थी। बैठक में लोकसभा सत्र में पार्टी के प्रदर्शन की समीक्षा की जानी थी। सभी की नज़र इस बात पर थी कि शशि थरूर इस बार आएंगे या नहीं। लेकिन वह फिर अनुपस्थित रहे। तिरुवनंतपुरम से सांसद थरूर लगातार कई बैठकों से दूर दिखाई दे रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है जब शशि थरूर कांग्रेस की बैठक में नहीं पहुंचे। पिछले तीन हफ्तों में वह पार्टी की तीन अहम बैठकों से गैरहाजिर रहे। हालांकि उन्होंने हर बार अनुपस्थिति का कारण पहले ही पार्टी को भेज दिया था। कई अन्य सांसद भी ऐसा करते हैं और पार्टी इसे नियमों के भीतर मान लेती है।

थरूर की हाल की अनुपस्थितियां:

  • 18 नवंबर को राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की बैठक से खराब तबीयत बताकर दूर रहे।
  • इससे एक दिन पहले वह प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में शामिल हुए थे और भाषण की प्रशंसा की थी।
  • 30 नवंबर को सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाली रणनीति बैठक में अपनी मां के साथ केरल में होने का कारण दिया।
  • 12 दिसंबर को राहुल गांधी की लोकसभा सांसदों वाली बैठक से भी केरल में व्यस्तता का हवाला देकर दूर रहे।

तकनीकी रूप से देखें तो थरूर ने हर बार सूचना दी है। इसलिए पार्टी कोई कार्रवाई नहीं कर सकती। यदि वह बिना बताए अनुपस्थित रहते, तो पार्टी कारण पूछ सकती थी। थरूर आखिरी बार 28 अक्टूबर को कांग्रेस मुख्यालय में हुई केरल कांग्रेस की बैठक में दिखे थे।

कांग्रेस में संदेह क्यों है?
थरूर को लेकर पार्टी में शंका तब बढ़ी जब सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उन्हें सौंपा। इसके बाद उनके सोशल मीडिया पोस्ट और कई सार्वजनिक बयान भी पार्टी की लाइन से अलग दिखे। कांग्रेस कई बार इस पर चुप रहती है और कभी-कभी किसी नेता से प्रतिक्रिया दिलवा देती है। सवाल यह उठता है कि थरूर पार्टी की बैठकों से दूरी क्यों रखते हैं, जबकि अन्य कार्यक्रमों में सक्रिय रहते हैं।

कांग्रेस कार्रवाई क्यों नहीं करती?
थरूर ने कभी कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ चुनाव लड़ा था, फिर भी उन्हें कांग्रेस कार्यसमिति में शामिल किया गया। इसका बड़ा कारण केरल की राजनीति है। थरूर और के सी वेणुगोपाल के बीच तनाव की बात भी कही जाती है, क्योंकि वेणुगोपाल राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते हैं।

कांग्रेस जानती है कि केरल में थरूर लोकप्रिय हैं। वहां स्थानीय निकाय चुनाव चल रहे हैं और आगे विधानसभा चुनाव भी होने हैं। पार्टी नहीं चाहती कि थरूर को नाराज़ कर वह कोई जोखिम उठाए। थरूर खुद को केरल में मुख्यमंत्री पद का दावेदार मानते हैं, जबकि कांग्रेस इस विचार से सहमत नहीं है। यही कारण है कि थरूर कभी-कभी ऐसे तेवर दिखाते हैं, जो पार्टी को असहज कर देते हैं।

यदि पार्टी उन्हें बाहर करती है, तो वह फिर भी लोकसभा सदस्य बने रहेंगे और हर दिन कांग्रेस की आलोचना कर सकेंगे। यह स्थिति पार्टी के लिए और कठिन हो सकती है। इसलिए कांग्रेस टकराव से बचती है।

इसी वजह से शशि थरूर कांग्रेस के लिए ऐसी स्थिति में हैं, जिसमें न उन्हें हटाना आसान है और न ही पूरी तरह साथ रखना। यही कारण है कि वह पार्टी के लिए “न उगलते बन रहे हैं और न निगलते” साबित हो रहे हैं।

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