पूनम शर्मा
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव की घोषणा से पहले कई मुद्दों पर राजनीतिक हलचल मचा चुकी हैं । ममता बनर्जी पर अधिकारियों, विशेष रूप से आईटी डायरेक्टर के साथ बदसलूकी और उनके कार्य में बाधा डालने का आरोप लगा । उन्होंने कथित रूप से पूर्व डीजीपी और कोलकाता कमिश्नर की मौजूदगी में अधिकारियों से पूछताछ की, जिससे मामला कोलकाता हाई कोर्ट तक गया। कोलकाता में भय का ऐसा माहौल था कि कोर्ट की महिला जजों ने सुरक्षा कारणों से केस की सुनवाई से हिचकिचाहट दिखाई। अंततः मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां खुद ममता बनर्जी ने काफी हंगामा किया। इसके परिणामस्वरूप, इस केस से जुड़े कई प्रमुख लोगों गिरफ्तारी हुई, जिसमें आई-पैक (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी) के डायरेक्टर भी शामिल थे, जिन्हें 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया था ।
गिरफ्तारियां और राजनीतिक असर
आई-पैक के डायरेक्टर विनेश चंदेल की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तारी ने प्रसिद्ध राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की परेशानियाँ बढ़ा दी थीं । चंदेल को हिरासत में लेकर एक विशेष जज के सामने पेश किया गया, जिन्होंने उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया । यह घटनाक्रम बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि आई-पैक कई राजनीतिक पार्टियों, जिसमें ममता बनर्जी की टीएमसी भी शामिल है, को राजनीतिक सलाहकार सेवाएँ दे रहा था। जाँच में यह पता लगाया कि क्या आई-पैक को किए गए भुगतान कोयला घोटाले से जुड़े थे, जिसमें कथित तौर पर राजनीतिक सलाह के लिए भारी रकम का हेरफेर हुआ। यह घोटाला पर्दे के पीछे की वित्तीय और राजनीतिक कड़ियों को उजागर कर सकता है, और यह गिरफ्तारी ममता बनर्जी एवं प्रशांत किशोर दोनों के लिए बड़ा झटका थी ।
सुप्रीम कोर्ट ,राजनीतिक दल
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया था , खासकर जब यह रिपोर्ट आई कि बंगाल में चुनाव ड्यूटी कर रहे जजों को राजनीतिक भीड़ ने निशाना बनाया। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को जजों पर हमले की जाँच और साजिश में राजनीतिक दलों की भूमिका की जांच का निर्देश दिया। प्रारंभिक रिपोर्टों में पाया गया कि कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दलों के सदस्य जजों को डराने-धमकाने या नुकसान पहुँचाने की साजिश में शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता से जांच को नई गति मिली , जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी राजनीतिक या अन्य संबधों की गहनता से जांच हो। यह जांच राजनीतिक दलों की हिंसा फैलाने और न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप की भूमिका को तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाने के लिए की गई जिससे आज की तारीख में वोटिंग सफलतापूर्वक संभव हुई ।