- एसआईटी ने पूर्व महासचिव चंपत राय से करीब दो घंटे तक पूछताछ की।
- चंपत राय ने दान गबन में किसी भी भूमिका से इनकार करते हुए स्वयं शिकायतकर्ता होने का दावा किया।
- एफआईआर में आठ आरोपी नामजद हैं और प्रारंभिक जांच में 7–7.5 करोड़ रुपये के गबन की आशंका जताई गई है।
- जांच दल ने दान संग्रह, नकदी गिनती, सुरक्षित रखरखाव और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी जुटाई।
समग्र समाचार सेवा
अयोध्या, 30 जून : राम मंदिर के कथित दान गबन मामले की जांच तेज हो गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय से करीब दो घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान जांच अधिकारियों ने मंदिर में प्राप्त होने वाले नकद दान, बहुमूल्य वस्तुओं के संग्रह, उनकी गिनती, सुरक्षित रखरखाव और बैंक खातों में जमा करने की पूरी प्रक्रिया से जुड़े कई सवाल पूछे।
सूत्रों के अनुसार, 27 जून को महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद पहली बार चंपत राय का आधिकारिक बयान दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान उन्होंने दान गबन में किसी भी प्रकार की भूमिका से साफ इनकार किया। उन्होंने जांच दल से कहा कि कथित अनियमितताओं की जानकारी मिलने पर उन्होंने स्वयं शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर आरोपितों की गिरफ्तारी हुई।
इस मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार, आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है। इनमें दान की नकदी गिनने वाले छह कर्मचारी भी शामिल हैं। जांच एजेंसियों का दावा है कि सीसीटीवी फुटेज में कथित गड़बड़ी के साक्ष्य मिलने के बाद सभी आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में लगभग 7 से 7.5 करोड़ रुपये के गबन की आशंका जताई गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त रुख और एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद मामले की जांच को गति मिली। राम मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जिसके कारण दान राशि भी काफी अधिक होती है। ट्रस्ट की पिछली वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में मंदिर को दान और ब्याज सहित सैकड़ों करोड़ रुपये की आय हुई थी।
फिलहाल एसआईटी मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित अधिकारियों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच पर सभी की नजर बनी हुई है।