मोदी 3.0 मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें तेज, जुलाई में बड़े फेरबदल की चर्चा

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कुमार राकेश
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली मोदी 3.0 सरकार के मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार और फेरबदल को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बड़े बदलाव की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है, हालांकि सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार 5 जुलाई के आसपास या फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 11 जुलाई को प्रस्तावित विदेश यात्रा से लौटने के बाद किया जा सकता है। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस संबंध में लगातार चर्चाएं चल रही हैं।

प्रधानमंत्री के व्यस्त कूटनीतिक कार्यक्रम को देखते हुए मंत्रिमंडल विस्तार के समय को लेकर भी मंथन जारी है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 30 जून और 1 जुलाई को आंध्र प्रदेश के दौरे पर हैं, जबकि 1 से 3 जुलाई के बीच जापान के प्रधानमंत्री के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी उनकी मेजबानी करेंगे। इसके बाद 4 जुलाई को प्रधानमंत्री राजस्थान जाएंगे और 6 से 11 जुलाई तक इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा पर रहेंगे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार मानसून सत्र शुरू होने से पहले मंत्रिमंडल विस्तार कर सकती है, ताकि नए मंत्रियों को अपने मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभालने और संसद की कार्यवाही की तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

सूत्रों के मुताबिक संभावित फेरबदल में कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों को हटाया जा सकता है या उनके विभागों में बदलाव किया जा सकता है। आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), महिलाओं और अल्पसंख्यक समुदायों को अधिक प्रतिनिधित्व दिए जाने की भी चर्चा है।

राजनीतिक हलकों में जिन नामों की चर्चा हो रही है, उनमें भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव शक्तिकांत दास का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। इसके अलावा वरिष्ठ मंत्रियों निर्मला सीतारमण, धर्मेंद्र प्रधान, हरदीप सिंह पुरी और मनोहर लाल खट्टर के विभागों में संभावित बदलाव की भी अटकलें लगाई जा रही हैं।

कई सांसदों के भी केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होने की चर्चाएं हैं। इनमें शिवसेना के श्रीकांत शिंदे, मेरठ से सांसद अरुण गोविल, खजुराहो से सांसद विष्णुदत्त शर्मा, बिहार के महाराजगंज से सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहा है। अनुराग ठाकुर की मंत्रिमंडल में वापसी की संभावना भी राजनीतिक चर्चाओं का हिस्सा बनी हुई है।

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि एनडीए सहयोगी दलों के साथ संतुलन बनाए रखना भी संभावित फेरबदल का एक महत्वपूर्ण पहलू हो सकता है। ऐसी चर्चाएं हैं कि शिवसेना समेत कुछ अन्य सहयोगी दलों को मंत्रिमंडल में अतिरिक्त प्रतिनिधित्व मिल सकता है। पंजाब और महाराष्ट्र की हालिया राजनीतिक परिस्थितियों को भी इस संभावित विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार प्रदर्शन आधारित समीक्षा के तहत 10 से 12 मंत्रियों को हटाया जा सकता है, जबकि कई राज्य मंत्रियों की भी छुट्टी हो सकती है। यह भी चर्चा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने हाल के दिनों में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभिन्न मंत्रालयों के कार्यों की समीक्षा की है, जिसे संभावित पुनर्गठन की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, मंत्रिमंडल विस्तार, संभावित नामों और विभागों में बदलाव से जुड़ी सभी चर्चाएं फिलहाल केवल अटकलों और राजनीतिक सूत्रों पर आधारित हैं। केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के राष्ट्रपति के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र में होगा।

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