कर्नाटक कैबिनेट में बड़ा झटका: पोर्टफोलियो विवाद के बीच रामलिंगा रेड्डी ने दिया इस्तीफा

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  • कर्नाटक के वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामलिंगा रेड्डी ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया।
  • शपथ ग्रहण के महज दो दिन बाद लिया बड़ा फैसला।
  • बेंगलुरु विकास विभाग नहीं मिलने पर जताई नाराजगी।
  • मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार पर वादा पूरा न करने का आरोप।
  • भाजपा ने इसे कांग्रेस सरकार में बढ़ती अंदरूनी कलह का संकेत बताया।
  • रेड्डी ने कहा कि अब कोई भी मंत्री पद स्वीकार नहीं करेंगे।
  • बेंगलुरु से बड़ी राजनीतिक खबर

समग्र समाचार सेवा
कर्नाटक, ५ जून: कर्नाटक की नई सरकार के गठन के महज दो दिन बाद मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और आठ बार के विधायक रामलिंगा रेड्डी ने शुक्रवार को राज्य मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने विभागों के बंटवारे को लेकर असंतोष जताते हुए मंत्री पद छोड़ने की घोषणा की।

बेंगलुरु विकास विभाग का था वादा
रामलिंगा रेड्डी ने दावा किया कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद संभालने से पहले उनके घर जाकर उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग देने का आश्वासन दिया था।
रेड्डी ने कहा, “मैंने किसी विभाग की मांग नहीं की थी। मुख्यमंत्री ने स्वयं बेंगलुरु विकास विभाग देने की बात कही थी और मैंने उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था।”
उनका आरोप है कि यह आश्वासन दो बार दोहराया गया, लेकिन विभागों के अंतिम आवंटन में उन्हें सिंचाई विभाग सौंप दिया गया।

सिंचाई विभाग स्वीकार नहीं
रेड्डी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें सिंचाई विभाग स्वीकार नहीं है और इसी कारण उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।
उन्होंने कहा, “मुझे बेंगलुरु विकास विभाग देने का वादा किया गया था। इसके बजाय सिंचाई विभाग दिया गया, जो मेरे लिए स्वीकार्य नहीं है। इसलिए मैंने मंत्री पद छोड़ दिया है।”

दोबारा मंत्री बनने से भी इनकार
रामलिंगा रेड्डी ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि भविष्य में उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग की पेशकश भी की जाती है, तब भी वे मंत्री पद स्वीकार नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा, “अब अगर मुझे बेंगलुरु विकास विभाग भी दिया जाता है तो मैं स्वीकार नहीं करूंगा। मैं विधायक के रूप में जनता की सेवा करूंगा और कांग्रेस पार्टी में बना रहूंगा।”

बैठक से नाराज होकर निकले थे बाहर
सूत्रों के अनुसार, विभागों के बंटवारे को लेकर हुई चर्चा के दौरान रेड्डी ने अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर की थी। बताया जा रहा है कि उन्होंने बेंगलुरु विकास विभाग पर जोर दिया था और गुरुवार को मंत्रियों की जिम्मेदारियों से जुड़ी बैठक बीच में ही छोड़कर चले गए थे।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि रेड्डी ने मुख्यमंत्री को वर्ष 2023 में किए गए उस वादे की भी याद दिलाई थी, जिसमें उन्हें भविष्य के किसी कैबिनेट फेरबदल में बेंगलुरु विकास विभाग देने की बात कही गई थी।

भाजपा ने साधा निशाना
रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे के बाद भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि यह घटना कांग्रेस के भीतर बढ़ती असहमति और अस्थिरता को दर्शाती है।
उन्होंने कहा, “सरकार के भीतर आगे भी मतभेद बढ़ेंगे। केवल मुख्यमंत्री बदलने से कांग्रेस की समस्याएं समाप्त नहीं होंगी।”

कांग्रेस ने किया बचाव
वहीं कांग्रेस ने मामले को शांत करने की कोशिश की है। कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने रामलिंगा रेड्डी को पार्टी और राज्य का महत्वपूर्ण नेता बताते हुए कहा कि उनके योगदान का सम्मान किया जाता है।

वरिष्ठ नेता हैं रामलिंगा रेड्डी
73 वर्षीय रामलिंगा रेड्डी कर्नाटक कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वे बेंगलुरु के बीटीएम लेआउट विधानसभा क्षेत्र से आठ बार विधायक चुने जा चुके हैं। इससे पहले वे परिवहन, गृह और मुजराई जैसे महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व भी संभाल चुके हैं।
उनका इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हाल ही में राज्य की कमान संभाली है और नई सरकार अपने शुरुआती चरण में है।

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