- केंद्र, असम और नागालैंड के बीच तेल एवं गैस अन्वेषण के लिए त्रिपक्षीय समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर।
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में समझौता संपन्न।
- असम-नागालैंड सीमा क्षेत्र में तेल और गैस की खोज के नए अवसर पैदा होंगे।
- पूर्वोत्तर क्षेत्र में ऊर्जा, निवेश और विकास का नया आर्थिक कॉरिडोर बनने की उम्मीद।
- नागालैंड के तेल, गैस और खनिज संसाधन भारत की आयात-निर्भरता कम करने में सहायक होंगे।
- पूर्वोत्तर के लगभग 80% क्षेत्र से AFSPA हटाया जा चुका है।
- नए आर्थिक युग की शुरुआत
केंद्र, असम और नागालैंड के बीच त्रिपक्षीय समझौता
समग्र समाचार सेवा
असम, 12 जून: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में भारत सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच असम-नागालैंड सीमा क्षेत्र में खनिज तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण को सुगम बनाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
ऊर्जा और निवेश का नया कॉरिडोर
इस समझौते के माध्यम से असम-नागालैंड सीमा क्षेत्र में तेल और गैस की खोज, उत्पादन तथा संबंधित उद्योगों के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा। सरकार के अनुसार, यह पहल पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में ऊर्जा, निवेश और समृद्धि का एक नया आर्थिक कॉरिडोर विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
तेल और गैस क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
नागालैंड में उपलब्ध विशाल तेल, प्राकृतिक गैस और अन्य खनिज संसाधन देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ विदेशी तेल और गैस आयात पर निर्भरता कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
AFSPA-मुक्त पूर्वोत्तर की ओर
इस अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से को पहले ही AFSPA के दायरे से बाहर लाया जा चुका है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आने वाले समय में पूरा पूर्वोत्तर AFSPA-मुक्त होगा।
यह त्रिपक्षीय समझौता पूर्वोत्तर क्षेत्र के आर्थिक विकास, ऊर्जा क्षेत्र के विस्तार और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।