- झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के तीन सदस्यों ने एक साथ अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
- इस्तीफा देने वालों में डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद शामिल हैं।
- CID ने तीनों सदस्यों को पहले ही पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था।
- JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों के आंदोलन के बीच इस्तीफे से प्रशासनिक और राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।
समग्र समाचार सेवा
रांची, झारखंड 9 अगस्त : रांची झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में एक साथ तीन सदस्यों के इस्तीफे से प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस्तीफा देने वाले सदस्यों में डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद शामिल हैं। बताया जा रहा है कि तीनों सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने में करीब एक महीने का ही समय बचा था।
तीनों के इस्तीफे ऐसे समय में हुए हैं, जब JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन लगातार जारी है। छात्र परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
CID ने पहले ही भेजा था नोटिस
जानकारी के मुताबिक, CID की ओर से तीनों JPSC सदस्यों को पहले ही पूछताछ के लिए नोटिस भेजा गया था। हालांकि, एजेंसी किन खास बिंदुओं पर उनसे पूछताछ करना चाहती थी, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं हुई है।
अब तीनों सदस्यों के इस्तीफे के बाद CID की जांच को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। जांच किस दिशा में आगे बढ़ेगी और क्या इस्तीफे का जांच प्रक्रिया पर कोई असर पड़ेगा, इस पर भी निगाहें टिकी हैं।
कार्यकाल खत्म होने से पहले सामूहिक इस्तीफा
तीनों सदस्यों का कार्यकाल करीब एक महीने बाद समाप्त होने वाला था। ऐसे में एक साथ तीन सदस्यों का पद छोड़ना महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। JPSC में आयोग के सदस्यों की भूमिका प्रतियोगी परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में होती है।
इस्तीफे की खबर सामने आने के बाद आयोग की कार्यप्रणाली और हाल के विवादों को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। हालांकि, इस्तीफा देने वाले सदस्यों की ओर से इस घटनाक्रम को लेकर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
छात्र आंदोलन के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
JPSC-JSSC में कथित भ्रष्टाचार और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार की मांग को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन जारी है। छात्रों ने पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।
इसी बीच तीन सदस्यों के इस्तीफे ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है। राजनीतिक दल भी छात्रों के आंदोलन को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। सरकार की ओर से पहले न्याय सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया गया है।
अब निगाहें सरकार और JPSC की आधिकारिक प्रतिक्रिया के साथ-साथ CID की अगली कार्रवाई पर हैं। खास तौर पर यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पूछताछ के लिए भेजे गए नोटिस के पीछे क्या आधार था और कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है।