- आरजी कर मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या मामले की नए सिरे से जाँच होगी।
- पीड़िता की माँ रत्ना देबनाथ के अनुरोध पर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने यह फैसला लिया।
- 1952 के विशेष आयोग अधिनियम के तहत नई जांच कराने की घोषणा की गई।
- पीड़िता के अंतिम संस्कार में कथित अनियमितताओं की भी अलग से जांच के निर्देश दिए गए।
समग्र समाचार सेवा
कोलकाता , 9 अगस्त : कोलकाता। आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 2024 में हुई महिला डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासन को केंद्र में ला दिया है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने रविवार को मामले की जांच नए सिरे से शुरू करने की घोषणा की। यह फैसला मृतका की मां रत्ना देबनाथ के अनुरोध के बाद लिया गया है। रत्ना देबनाथ अब भारतीय जनता पार्टी की विधायक हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रत्ना देबनाथ ने उनसे लिखित रूप में मामले की दोबारा जांच कराने का आग्रह किया था। मुख्य सचिव और विशेषज्ञों की टीम के साथ चर्चा के बाद सरकार ने 1952 के विशेष आयोग अधिनियम के तहत नए सिरे से जांच कराने का निर्णय लिया है।
अधिकारी ने मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अपनी जिम्मेदारियों का उचित तरीके से निर्वहन नहीं किया। मुख्यमंत्री ने मृतका के अंतिम संस्कार से जुड़ी कथित अनियमितताओं की अलग जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई के निर्देश भी दिए।
इस बीच, आरजी कर कांड की दूसरी बरसी पर रविवार को पश्चिम बंगाल के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों ने दो मिनट का मौन रखकर मृतका को श्रद्धांजलि दी। आरजी कर मेडिकल कॉलेज परिसर में तैनात अर्धसैनिक बलों के जवान भी इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल हुए।
पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट ने भी मृतका की स्मृति में उत्तर कोलकाता के चितपुर इलाके में जरूरतमंद लोगों के लिए मेडिकल कैंप लगाया। बाद में डॉक्टरों ने कॉलेज स्ट्रीट से एस्प्लेनेड तक मार्च निकालकर मामले में न्याय और कथित रूप से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी एवं मुकदमे की मांग की।
इस मामले में संजय रॉय को एकमात्र दोषी ठहराया गया था और सियालदह की अदालत ने उसे शेष जीवन जेल में बिताने की सजा सुनाई थी। हालांकि, मृतका के माता-पिता और उनके कई सहकर्मी लगातार यह सवाल उठाते रहे हैं कि वारदात में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। मामले के कथित साजिश वाले पहलू की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) भी कर रहा है।
आरजी कर कांड के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में डॉक्टरों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए कई दिशा-निर्देश जारी किए थे। अब राज्य सरकार द्वारा नए सिरे से जांच की घोषणा के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।