आशा जडेजा मोटवानी ने किया मोहन भागवत का स्वागत
न्यूयॉर्क में आयोजित एक विशेष गोलमेज बैठक के दौरान भारतीय-अमेरिकी उद्यमी ने आरएसएस प्रमुख के दृष्टिकोण और भारतीय युवाओं की क्षमता की खुलकर सराहना की।
- भारतीय-अमेरिकी वेंचर कैपिटलिस्ट आशा जडेजा मोटवानी ने न्यूयॉर्क में आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से मुलाकात के बाद भारतीय युवाओं में उनके ‘अटूट विश्वास’ की सराहना की।
JournalArta - इस उच्चस्तरीय गोलमेज बैठक में अंतरिक्ष, स्वच्छ ऊर्जा, क्वांटम कंप्यूटिंग और भारत-अमेरिका संबंधों जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
- मोटवानी ने मोहन भागवत को भारत-अमेरिका मित्रता का सच्चा समर्थक बताते हुए कहा कि वह देश के युवाओं को सबसे बड़ा समर्थन देने वाले नेता हैं।
समग्र समाचार सेवा
नया न्यूयॉर्क, 30 अगस्त: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत की अमेरिका यात्रा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा चर्चा का विषय बनी हुई है। इस वैश्विक आउटरीच कार्यक्रम के तहत न्यूयॉर्क में एक विशेष गोलमेज बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न उद्योगों के दिग्गजों और निवेशकों ने हिस्सा लिया। New India Abroad की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रतिष्ठित बैठक में प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी वेंचर कैपिटलिस्ट और निवेशक आशा जडेजा मोटवानी (Asha Jadeja Motwani) ने प्रमुख रूप से शिरकत की और संघ प्रमुख का स्वागत किया। उन्होंने बैठक के बाद मोहन भागवत के विचारों और भारत के भविष्य को लेकर उनके स्पष्ट नजरिए की गहरी प्रशंसा की है।
भारतीय युवाओं की क्षमता और ‘अटूट विश्वास’
बैठक के बाद अपने विचार साझा करते हुए आशा जडेजा मोटवानी ने कहा कि डॉ. मोहन भागवत के मन में देश की युवा पीढ़ी को लेकर एक अलग ही प्रकार का अटूट विश्वास और सकारात्मकता देखने को मिली है। उन्होंने बताया कि संघ प्रमुख का यह स्पष्ट मानना है कि आज का भारतीय युवा देश की तस्वीर बदलने की पूरी क्षमता रखता है। मोटवानी के अनुसार, वे युवाओं की मांग और उनकी ऊर्जा को देश के विकास का सबसे बड़ा इंजन मानते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के नेतृत्व से यह पूरा विश्वास मजबूत होता है कि आने वाले समय में भारतीय युवा ऐतिहासिक बदलाव लाने में पूरी तरह सक्षम हैं।
प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंध
इस उच्चस्तरीय गोलमेज चर्चा में केवल सामाजिक मुद्दों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें तकनीक, अंतरिक्ष विज्ञान, दूरसंचार, स्वच्छ ऊर्जा और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर भी गहन संवाद हुआ। बैठक में उपस्थित उद्योगपतियों और टेक लीडर्स ने विभिन्न सवालों के माध्यम से भारत की विकास यात्रा पर चर्चा की, जिनका संघ प्रमुख ने बहुत ही सकारात्मक और स्पष्ट तरीके से जवाब दिया। मोटवानी ने मोहन भागवत को ‘भारत-अमेरिका मित्रता का सच्चा समर्थक’ करार देते हुए कहा कि वह दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और तकनीकी सेतु को मजबूत करने के प्रबल पक्षधर हैं।
औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और नया भारत
भारतीय-अमेरिकी निवेशक ने इस बात पर भी जोर दिया कि आरएसएस जैसी संस्थाओं के सहयोग से देश अब अपनी पुरानी औपनिवेशिक संरचनाओं और बेड़ियों को पीछे छोड़कर तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि भारत की युवा शक्ति पारंपरिक सीमाओं को पार कर वैश्विक मंच पर अपनी एक नई और सशक्त पहचान बना रही है। यह बैठक आगे होने वाले ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ (Madison Square Garden event) के लिए भी एक बेहद महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि तैयार करने वाली साबित हुई है, जहाँ दुनिया भर से आए प्रवासी भारतीय अपने सांस्कृतिक मूल्यों और एकता का संदेश साझा कर रहे हैं।