सोन नदी विवाद समाप्त, बिहार और झारखंड के बीच पानी का बँटवारा तय
दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुए नए समझौते से दोनों राज्यों के करोड़ों लोगों को मिलेगा सिंचाई और पेयजल का लाभ।
नई दिल्ली, 1 सितंबर: देश के पूर्वी हिस्से में लंबे समय से चले आ रहे एक बड़े अंतर-राज्यीय विवाद का आखिरकार सुखद अंत हो गया है। नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के जल बंटवारे से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत Soरेन भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस समझौते के हो जाने से दोनों राज्यों के बीच वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक और भौगोलिक अड़चनें दूर हो गई हैं।
सहकारी संघवाद की मिसाल और नया समझौता
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों से हुए इस समझौते को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘टीम इंडिया’ की अवधारणा का एक बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है। इस समझौते के तहत यह तय किया गया कि बिहार राज्य को 5.75 MAF (मिलियन एकड़ फीट) तथा झारखंड राज्य को 2.00 MAF जल आवंटित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि यह फॉर्मूला दोनों राज्यों की भौगोलिक वास्तविकताओं और वहां की जनता की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ तैयार किया गया है।
समग्र विकास और जल संसाधनों का सुदृढ़ीकरण
इस ऐतिहासिक समझौते से झारखंड के पलामू, गढ़वा तथा अन्य सीमावर्ती जिलों में सिंचाई संकट का स्थायी समाधान निकलेगा। साथ ही, बिहार के कई प्रमुख जिलों में भी जल संसाधनों का सुदृढ़ीकरण होगा, जिससे कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी। दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि यह समझौता केवल पानी का बँटवारा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास और आपसी सौहार्द को नई गति प्रदान करने वाला एक ऐतिहासिक कदम है।