“कहीं आप भी तो नहीं करते अंडा खाते समय ये गलतियां”

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समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 10 अक्टूबर ।

अंडे में प्रोटीन, विटामिन के अलावा कई ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो शरीर के लिए बहुत जरूरी होते हैं। इसलिए डॉक्टर्स भी हर दिन कम से कम एक अंडा खाने की सलाह जरूर देते हैं।
लेकिन सभी लोगो के अंडे खाने के तरिके अलग होते है- कई लोग अंडे को कच्चा खाते हैं तो कुछ लोग अंडे को फ्राई, पोच्ड, बेक, माइक्रोवेव या फिर मसालों में पकाकर भी खाते हैं। अंडे खाने के और भी कई तरीके हैं लेकिन ये सभी तरीके सेहतमंद नहीं होते हैं, आइए जानते हैं कि अंडा बनाने का कौन सा तरीका सबसे सही है –

1.अंडे को अच्छे से पकाकर खाना सबसे सुरक्षित माना जाता है। इस तरह से पकाया गया अंडा आसानी से पच जाता है। एक स्टडी के मुताबिक कच्चे अंडे में 51 फीसदी प्रोटीन पाया जाता है जबकि पकाए हुए अंडे में 91 फीसदी प्रोटीन पाया जाता है।
2. कच्चे अंडे में प्रोटीन अलग-अलग हिस्सों में होता है और इनकी बनावट ऐसी होती है कि ये आपस में मिल नहीं पाते हैं और जब अंडे को तापमान पर पकाया जाता है तो प्रोटीन की ये अलग-थलग बनावट टूट जाती है और ये सारे प्रोटीन एक साथ मिल जाते हैं। अंडे के इस प्रोटीन को शरीर के लिए पचाना आसान होता है।
3. अंडा बायोटिन का बहुत अच्छा स्रोत है। ये विटामिन B7 और विटामिन H के रूप में भी जाना जाता है। कच्चे अंडे में एविडिन प्रोटीन होता है जो बायोटिन को बनने नहीं देता है। वहीं अंडे को पकाने से एविडिन बदल जाता है जिससे शरीर को बायोटिन मिलता है।
4. वैसे तो अंडे को पकाकर ही खाना सबसे सही है लेकिन तेज तापमान पर पकाने से इसके कई पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। अंडे को देर तक पकाने से उसका विटामिन ए लगभग 17-20 फीसदी तक कम हो जाता है।अंडे के माइक्रोवेव करने, उबालने और फ्राई करने से इसके एंटीऑक्सीडेंट में 6 से 18 फीसदी तक की कमी आ जाती है।
5. तेज तापमान पर भी अंडे को जल्दी पका लेने से उसमें कुछ पोषक तत्व मौजूद रहते हैं। अंडे को 40 मिनट तक बेक करने से इसके विटामिन डी में 61 फीसदी तक की कमी आ जाती है जबकि फ्राई करने या उबालने पर इसमें 18 फीसदी की कमी आती है।
6.अंडे की जर्दी में बहुत सारा कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है। एक बड़े अंडे में लगभग 212 मिलीग्राम कोलेस्ट्रॉल होता है। जब अंडे को ज्यादा तापमान पर पकाया जाता है तो ये कोलेस्ट्रॉल ऑक्सीकृत होकर ऑक्सीस्टेरोल में बदल जाता है। कई लोगों के लिए ये चिंता की बात है क्योंकि ऑक्सीस्टेरोल से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

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