11 अक्टूबर को मनाया जाएगा बुध प्रदोष व्रत, इस शुभ मुहूर्त में करें जरूर करें भगवान शिव के चमत्कारी स्तोत्र का पाठ

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 10अक्टूबर। हिन्दू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन बुध प्रदोष व्रत रखा जाएगा. यह व्रत कल यानी 11 अक्टूबर के दिन रखा जाएगा. मान्यता है कि इस विशेष दिन पर भगवान शिव की उपासना करने से साधकों को भय, रोग, दोष और कई प्रकार की समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है. साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. बता दें कि इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव की उपासना का विधान है. ऐसे में आइए जानते हैं प्रदोष काल का समय और भगवान शिव को समर्पित चमत्कारी स्तोत्र.

बुध प्रदोष व्रत 2023 शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, 11 अक्टूबर को शाम में 05 बजकर 37 मिनट पर प्रारंभ हो जाएगी और इस तिथि का समापन 12 अक्टूबर शाम 07 बजकर 53 मिनट पर हो जाएगा. प्रदोष काल में पूजा हेतु व्रत 11 अक्टूबर 2023, बुधवार के दिन रखा जाएगा. पंचांग में यह भी बताया गया है कि इस विशेष दिन पर दो अत्यंत शुभ योग का निर्माण हो रहा है.

बता दें कि बुध प्रदोष व्रत के दिन शुक्ल योग और शुभ योग का निर्माण हो रहा है. शुभ योग सुबह 08 बजकर 42 मिनट तक रहेगा और इसके बाद शुक्ल योग शुरू हो जाएगा. इस दिन प्रदोष पूजा मुहूर्त शाम 05 बजकर 57 मिनट से रात्रि 08 बजकर 26 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में भगवान शिव उपासना करने से और शिव रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को विशेष लाभ मिलता है.

बुध प्रदोष व्रत पर करें शिव रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम ।
निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेअहम ।।
निराकारमोंकारमूलं तुरीयं गिरा घ्य़ान गोतीतमीशं गिरीशम ।
करालं महाकाल कालं कृपालं गुणागार संसारपारं नतोअहम ।।

तुश्हाराद्रि संकाश गौरं गभीरं मनोभूत कोटिप्रभा श्री शरीरम ।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा ।।
चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम ।
मृगाधीशचर्माम्बरं मुण्डमालं प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि ।।

प्रचण्डं प्रकृश्ह्टं प्रगल्भं परेशं अखण्डं अजं भानुकोटिप्रकाशम ।
त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं भजे.अहं भवानीपतिं भावगम्यम ।।
कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी ।
चिदानन्द संदोह मोहापहारी प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी ।।

कृपया इस पोस्ट को साझा करें!

Leave A Reply

Your email address will not be published.