ट्रंप के टैरिफ पर भारत के समर्थन में आया चीन, अमेरिका पर साधा निशाना

चीन ने अमेरिकी टैरिफ को बताया 'संरक्षणवादी', कहा- यह वैश्विक व्यापार की स्थिरता के लिए खतरा है।

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  • अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का आदेश दिया है, जिससे कुल टैरिफ बढ़कर 50% हो गया है।
  • इस कदम के बाद चीन ने अमेरिका की कड़ी आलोचना करते हुए भारत का समर्थन किया है और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया है।
  • चीन ने कहा है कि भारत अपनी संप्रभुता के अनुसार फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है और उस पर कोई देश दबाव नहीं बना सकता।

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 7 अगस्त, 2025 – अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव अपने चरम पर है, लेकिन इस बार एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने के बाद चीन ने भारत का खुलकर समर्थन किया है। चीन के इस बयान ने दुनियाभर के राजनीतिक और व्यापारिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है, क्योंकि दोनों देशों के बीच अक्सर सीमा विवाद और भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता देखने को मिलती है। ट्रंप ने भारत पर यह कदम रूस से तेल खरीदने को लेकर उठाया है, जिस पर चीन ने अमेरिका को ‘व्यापारिक नियमों का दुरुपयोग’ बताया है।

ट्रंप का ‘टैरिफ बम’ और उसका असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत भारत से अमेरिका आने वाले सामानों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। यह नया टैरिफ पहले से लगे हुए 25 प्रतिशत शुल्क के अतिरिक्त है, जिससे भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में कुल 50 प्रतिशत का टैरिफ लगेगा। ट्रंप का यह फैसला रूस-यूक्रेन युद्ध के मद्देनजर लिया गया है। उनका आरोप है कि भारत रूस से तेल खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है, जो अमेरिका की नीतियों के खिलाफ है। इस टैरिफ का सबसे ज्यादा असर भारत के परिधान निर्यात और छोटे तथा मध्यम उद्यमों पर पड़ने की आशंका है।

चीन ने अमेरिका पर साधा निशाना

ट्रंप के इस कदम पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चीन हमेशा से टैरिफ के दुरुपयोग का विरोध करता आया है और इस पर हमारा रुख स्पष्ट है। उन्होंने अमेरिका के इस कदम को व्यापारिक नियमों का दुरुपयोग और वैश्विक व्यापार की स्थिरता के लिए एक बड़ा खतरा बताया। इसके अलावा, भारत में चीनी दूतावास के प्रवक्ता शू फेइहोंग ने भी ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में भारत का समर्थन किया। उन्होंने लिखा, “भारत की संप्रभुता किसी सौदे का हिस्सा नहीं हो सकती और उसकी विदेश नीति को कोई दूसरा देश अपने हिसाब से नहीं चला सकता।” उन्होंने अमेरिका को “धौंस जमाने वाला बदमाश” भी कहा।

क्यों भारत के समर्थन में आया चीन?

चीन का भारत के समर्थन में आने का कारण केवल भू-राजनीतिक नहीं, बल्कि व्यापारिक भी है। चीन भी लंबे समय से अमेरिका के टैरिफ हमलों का सामना कर रहा है और खुद को अमेरिका की ‘संरक्षणवादी’ नीतियों का शिकार मानता है। इस मुद्दे पर भारत का समर्थन करके, चीन एक वैश्विक गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहा है जो अमेरिका की एकतरफा व्यापार नीतियों के खिलाफ खड़ा हो सके। यह चीन की रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह ब्रिक्स (BRICS) जैसे बहुपक्षीय मंचों को मजबूत करके डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहता है। यह घटना दर्शाती है कि वैश्विक राजनीति में दुश्मन का दुश्मन दोस्त हो सकता है, भले ही वह अस्थायी ही क्यों न हो।

 

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