- समझौते से अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब के नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम में भागीदारी का अधिकार
- रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब को अपने देश में यूरेनियम संवर्धन (enrichment) की अनुमति मिल सकती है
- अमेरिकी ऊर्जा मंत्री का दावा—समझौता “परमाणु सुरक्षा और अप्रसार के उच्चतम मानकों” के अनुरूप
- आलोचकों को डर—यूरेनियम संवर्धन से क्षेत्रीय परमाणु हथियारों की दौड़ तेज हो सकती है
समग्र समाचार सेवा
वॉशिंगटन/रियाद : 23 जुलाई अमेरिका और सऊदी अरब ने नागरिक परमाणु सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच दशकों लंबी साझेदारी की नींव रखी गई है। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअज़ीज़ बिन सलमान द्वारा घोषित इस समझौते के तहत अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब में परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के विकास और संचालन का महत्वपूर्ण अवसर मिलेगा, जिसमें शांति पूर्ण ऊर्जा उपयोग पर ज़ोर है।
जहां अमेरिकी ऊर्जा विभाग इस समझौते को अमेरिकी उद्योग और वैश्विक अप्रसार के लिए एक अवसर मान रहा है, वहीं कांग्रेस में कई आलोचक—जैसे डेमोक्रेट सांसद जॉन गरामेंडी—चेतावनी दे रहे हैं कि यह समझौता मध्य पूर्व में परमाणु हथियारों के विकास का रास्ता खोल सकता है। अब यह समझौता समीक्षा के लिए अमेरिकी कांग्रेस में जाएगा, हालांकि इसे रोकने के लिए पर्याप्त वोट मिलने की संभावना नहीं है।
सऊदी अधिकारी कहते हैं कि यह समझौता परमाणु सुरक्षा, सुरक्षा मानक और सतत विकास को मजबूत करेगा। वर्षों से अमेरिकी परमाणु तकनीक की चाह रखने वाला सऊदी अरब इसे एक बड़ी कूटनीतिक और तकनीकी जीत मान रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि सऊदी अरब को पहला रिएक्टर चालू करने में करीब एक दशक लग सकता है। फिलहाल, दोनों सरकारें इसे शांति पूर्ण ऊर्जा व आर्थिक विकास पर केंद्रित बता रही हैं।